देहरादून: देहरादून में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर आयोजित सम्मेलन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक और युगांतकारी पहल बताया। उत्तराखंड राज्य महिला आयोग द्वारा राजकीय दून मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि यह कानून देश की मातृशक्ति को सम्मान, अधिकार और भागीदारी देने वाला महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। यह केवल प्रतिनिधित्व बढ़ाने का प्रयास नहीं, बल्कि नीति निर्माण में महिलाओं की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा बदलाव है।
उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र की उन्नति में नारी शक्ति की भूमिका केंद्रीय है। महिला आज हर क्षेत्र—कृषि, उद्यमिता, राजनीति और सामाजिक नेतृत्व—में अपनी क्षमता का परिचय दे रही है। ऐसे में उन्हें समान अवसर और मंच देना समय की आवश्यकता है।
सीएम धामी ने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं—बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, उज्ज्वला योजना, जन-धन योजना और लखपति दीदी योजना—का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों ने महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार भी महिला सशक्तिकरण के लिए शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार के क्षेत्र में लगातार प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में स्वयं सहायता समूहों, ग्रामीण आजीविका मिशन और महिला उद्यमिता योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि संसद में प्रस्तावित विशेष सत्र के बाद यह अधिनियम जल्द ही पूरी तरह लागू होगा और देश में महिला नेतृत्व को नई दिशा मिलेगी।






