October 28, 2026 4:00 PM

दो आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति पर हाईकोर्ट में सुनवाई, जानिए क्या हुआ….

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट में भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों नीरू गर्ग और अरुण मोहन जोशी को केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर भेजने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने सुनवाई अगले दिन भी जारी रखने का निर्णय लिया। अदालत ने दोनों पक्षों को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के फैसले और स्थानांतरण से संबंधित नियमावली का अवलोकन करने को कहा है।

मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई। इससे पहले हाईकोर्ट ने मामले को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के समक्ष भेजा था। इसके खिलाफ सरकार ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। सरकार की ओर से कहा गया कि संबंधित अधिकारी केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर जा सकते हैं।

केंद्र में प्रतिनियुक्ति के आदेश को चुनौती

मामले के अनुसार, वर्ष 2005 बैच की आईपीएस अधिकारी नीरू गर्ग को केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन भारत-तिब्बत सीमा पुलिस में उपमहानिरीक्षक के पद पर भेजने का आदेश जारी किया गया। वहीं, वर्ष 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी और पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी अरुण मोहन जोशी को सीमा सुरक्षा बल में उपमहानिरीक्षक के पद पर नियुक्त किया गया।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पांच मार्च 2026 को प्रतिनियुक्ति संबंधी आदेश जारी किए थे। इसके बाद उत्तराखंड सरकार ने छह मार्च 2026 को दोनों अधिकारियों को कार्यमुक्त करने के आदेश जारी किए। इन आदेशों को अधिकारियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार से पूछा कि संबंधित स्तर के अधिकारियों के लिए प्रतिनियुक्ति के कितने पद निर्धारित हैं और उनमें से कितने स्थायी हैं। जवाब में बताया गया कि ऐसे 16 पद हैं, जिन पर प्रतिनियुक्ति के आधार पर केंद्र में तैनाती की जा सकती है, जबकि शेष पद राज्य सरकार के अधीन हैं। मामले में सुनवाई जारी है।

राम विलास यादव की याचिका पर भी सुनवाई

उत्तराखंड हाईकोर्ट में पूर्व अधिकारी राम विलास यादव की आय से अधिक संपत्ति के मामले में दायर याचिका पर भी सुनवाई हुई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सुनवाई जारी रखते हुए अगली तारीख 29 अक्टूबर तय की है। अदालत ने राज्य सरकार से तब तक मामले में अब तक हुई जांच का ब्योरा प्रस्तुत करने को कहा है।

राम विलास यादव उत्तराखंड सरकार के समाज कल्याण विभाग में अपर सचिव के पद पर कार्यरत रहे थे। इससे पहले वह उत्तर प्रदेश सरकार में लखनऊ विकास प्राधिकरण के सचिव भी रह चुके हैं। उनके खिलाफ लखनऊ में एक व्यक्ति ने आय से अधिक संपत्ति रखने की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके आधार पर उत्तराखंड सरकार ने जांच शुरू की।

जांच के दौरान सतर्कता टीम ने लखनऊ, देहरादून और गाजीपुर स्थित ठिकानों पर छापे मारे। खबर के अनुसार, इस दौरान आय से अधिक संपत्ति से संबंधित दस्तावेज मिले और कुछ संपत्तियां उनकी पत्नी के नाम पर होने की बात सामने आई। जांच में आय के मुकाबले करीब 500 गुना अधिक संपत्ति होने का दावा किया गया, जिसके आधार पर सरकार ने मुकदमा दर्ज किया।

मुकदमा दर्ज करने के सरकारी आदेश को निरस्त कराने के लिए राम विलास यादव ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। अदालत ने अब सरकार से जांच की प्रगति और अब तक हुई कार्रवाई का विवरण मांगा है।