रांची: चाइल्ड पोर्नोग्राफी में झारखंड देशभर में तीसरे स्थान पर है। यह खुलासा नेशनल क्राइम रिकॉड ब्यूरो(एनसीआरबी) की रिपोर्ट से हुआ। ब्यूरो की 2020 की रिपोर्ट के आंकड़े बेटियों की सुरक्षा के मामले में झारखंड की साख को बट्टा लगाने वाले हैं। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में दहेज प्रताड़ना और छोटी उम्र की बच्चियों के साथ हिंसा के मामले में भी इजाफा हुआ है।

पूरे देश में चाइल्ड पोर्नोगाफी के कुल 553 मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमें से केवल झारखंड से 71 केस दर्ज हैं। दूसरे नंबर पर केरल है, जहां 83 मामले सामने आये हैं। इस मामले में पड़ोसी राज्य बिहार एक बार फिर झारखंड से आगे निकल गया है। पहले स्थान पर रहे बिहार में 103 मामले दर्ज किए गए हैं। देशभर में चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामले में कर्नाटक का चौथा स्थान है, यहां 54 मामले दर्ज किये गये हैं। एनसीआरबी की 2020 रिपोर्ट में पांचवें स्थान पर तमिलनाडु को दर्शाया गया है। दक्षिण के इस समृद्ध राज्य में 53 मामले दर्ज किये गये हैं।
दर्ज मामलो के अनुसार शीर्ष पांच राज्य
बिहार- 103 केस
केरल- 83 केस
झारखंड- 71 केस
कर्नाटक- 54 केस
तमिलनाडु- 53
क्या कहते हैं मनोचिकित्सक
मनोचिकित्सक डॉ दीपक गिरि कहते हैं कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी के लत वाले लोग मानसिक विकृत के शिकार होते हैं या फिर नशे के आदी होते हैं। चाइल्ड पोर्नोग्राफी की मांग पूरे विश्व में बड़े स्तर पर बढ़ी है और लोग इसकी भारी कीमत चुकाते हैं। इसका फायदा विकृत मानसिकता के लोग झारखंड जैसे गरीब राज्यों के बच्चों और उनके परिजनों को बहला-फुसलाकर उठाते हैं।







