June 26, 2026 6:57 PM

हरिद्वार जमीन घोटाले में विजिलेंस का एक्शन तेज, आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी, IAS अधिकारी के घर भी सर्च

देहरादून। हरिद्वार नगर निगम जमीन घोटाले की जांच में विजिलेंस ने कार्रवाई तेज कर दी है। एफआईआर में नामजद आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी गई है। विजिलेंस की टीमें मामले से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाने में लगी हैं। इस कार्रवाई की निगरानी विजिलेंस मुख्यालय, देहरादून से की जा रही है।

जानकारी के अनुसार, जांच अधिकारी सीओ हर्षवर्धिनी सुमन की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई ने रफ्तार पकड़ी है। रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के बाद कुछ अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई, जबकि कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इसी क्रम में एक आईएएस अधिकारी के दिल्ली स्थित आवास पर भी विजिलेंस की टीम सर्च के लिए पहुंची है।

विजिलेंस की टीमें आरोपियों के विभिन्न ठिकानों पर जमीन खरीद से जुड़े दस्तावेज, फाइलें और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों की जांच कर रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

क्या है पूरा मामला?

वर्ष 2024 में निकाय चुनाव के दौरान हरिद्वार नगर निगम ने सराय गांव में लगभग 33 बीघा भूमि 53.70 करोड़ रुपये में खरीदी थी। बाद में आरोप लगे कि इस जमीन का वास्तविक बाजार मूल्य करीब 15 करोड़ रुपये था। यह भी सामने आया कि खरीद से पहले भूमि का लैंड यूज बदलकर उसकी कीमत कई गुना बढ़ा दी गई।

मामला सामने आने पर शासन ने जांच के आदेश दिए। सचिव रणवीर सिंह चौहान की जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र कुमार, नगर आयुक्त वरुण चौधरी और पीसीएस अधिकारी अजयवीर सिंह सहित कई अधिकारियों पर कार्रवाई की गई।

जांच में यह भी सामने आया कि निकाय चुनाव के दौरान आचार संहिता लागू होने के कारण जमीन खरीद प्रक्रिया की जिम्मेदारी तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी के पास थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर उनके खिलाफ सेवा से बर्खास्तगी की संस्तुति की गई, जबकि तत्कालीन जिलाधिकारी के खिलाफ मेजर पेनल्टी और पीसीएस अधिकारी अजयवीर सिंह की तीन वेतनवृद्धियां रोकने का निर्णय लिया गया।

जांच में सामने आए प्रमुख बिंदु

  • 19 सितंबर 2024 से भूमि खरीद प्रक्रिया शुरू होकर 26 अक्टूबर तक पूरी की गई।
  • नवंबर 2024 में अलग-अलग तारीखों पर लगभग 33–34 बीघा जमीन 70 करोड़ रुपये में खरीदी गई।
  • खरीद प्रक्रिया के दौरान ही भूमि की श्रेणी बदलकर उसकी कीमत कई गुना बढ़ा दी गई।
  • धारा 143 के तहत भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया मात्र 14 दिनों में पूरी कर दी गई।
  • जांच में राजस्व अभिलेखों और प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि हुई।

विजिलेंस अब इस पूरे मामले में पुख्ता साक्ष्य जुटाने में लगी है। जांच एजेंसी की छापेमारी से संकेत मिल रहे हैं कि हरिद्वार जमीन घोटाले की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है।

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