देहरादून। ई-फार्मेसी के विरोध में देशभर में चल रही हड़ताल का असर उत्तराखंड में भी देखने को मिला। आल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर 19 मई रात 12 बजे से 20 मई रात 12 बजे तक प्रदेशभर के अधिकांश मेडिकल स्टोर बंद रहे।
प्रदेश में करीब 11 हजार से अधिक मेडिकल स्टोरों में से लगभग 95 फीसदी दुकानें बंद रहीं। अकेले देहरादून जिले में करीब 10 से 12 करोड़ रुपये के कारोबार पर असर पड़ा। हालांकि, मरीजों को परेशानी से बचाने के लिए जन औषधि केंद्र, अस्पतालों की फार्मेसी और कुछ आवश्यक मेडिकल स्टोर खुले रखे गए।
होलसेल केमिस्ट एसोसिएशन देहरादून के महासचिव आकाश प्रभाकर ने कहा कि ऑनलाइन दवाइयों के बढ़ते कारोबार और भारी डिस्काउंट के कारण पारंपरिक मेडिकल स्टोरों का व्यापार प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि हर शहर में कुछ मेडिकल स्टोर खुले रखे गए हैं ताकि मरीजों को जरूरी दवाइयां मिलती रहें।
डिस्ट्रिक्ट कैमिस्ट एसोसिएशन देहरादून के अध्यक्ष मनीष नंदा ने कहा कि देशभर में करीब साढ़े 12 लाख मेडिकल स्टोर हैं और लाखों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। उन्होंने मांग की कि ई-फार्मेसी व्यवस्था पर नियंत्रण लगाया जाए और कॉर्पोरेट कंपनियों की ओर से दिए जा रहे भारी डिस्काउंट पर रोक लगे।
एसोसिएशन पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कोई निर्णय नहीं लिया तो भविष्य में अनिश्चितकालीन हड़ताल भी की जा सकती है।
वहीं, एफडीए के अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि हड़ताल को देखते हुए सभी ड्रग्स इंस्पेक्टर्स को अलर्ट पर रखा गया है। उन्होंने कहा कि यदि किसी मरीज को इमरजेंसी में दवा नहीं मिलती है तो संबंधित मेडिकल स्टोर के खिलाफ ड्रग्स एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।







