August 7, 2026 12:11 AM

संस्कृत शोध में उत्तराखंड-नेपाल की साझेदारी, जल्द होगा विश्वविद्यालयों के बीच समझौता

देहरादून। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय और नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के बीच संस्कृत अध्ययन एवं शोध को नई दिशा देने के लिए जल्द ही समझौता ज्ञापन (एमओयू) होने की संभावना है। इस पहल का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संयुक्त शोध, शिक्षक-छात्र आदान-प्रदान और अकादमिक सहयोग को मजबूत करना है।

इस संबंध में संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने नई दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास में नेपाल के कार्यवाहक राजदूत डॉ. सुरेंद्र थापा से मुलाकात कर संस्कृत अनुसंधान, शिक्षण पद्धतियों के आदान-प्रदान और विद्वानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

प्रस्तावित एमओयू के तहत दोनों विश्वविद्यालय संस्कृत से जुड़े विभिन्न विषयों पर संयुक्त शोध परियोजनाएं संचालित करेंगे। शोधार्थियों और विद्वानों को साझा अनुसंधान, संयुक्त प्रकाशन और अकादमिक कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर मिलेगा।

समझौते के माध्यम से शिक्षक और छात्र आदान-प्रदान कार्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे, जिससे दोनों देशों की शिक्षण परंपराओं और शोध पद्धतियों का अनुभव साझा किया जा सकेगा। साथ ही संस्कृत विद्वानों के बीच नियमित शैक्षणिक संवाद को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने कहा कि भारत और नेपाल के संबंध केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि संस्कृत, दर्शन, साहित्य और साझा सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़े हैं। दोनों विश्वविद्यालयों के बीच होने वाला यह सहयोग संस्कृत शोध और ज्ञान के आदान-प्रदान को नई गति देगा।

उत्तराखंड में संस्कृत को दूसरी राजभाषा का दर्जा मिलने के बाद राज्य सरकार संस्कृत शिक्षा और शोध को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। नेपाल के साथ प्रस्तावित यह शैक्षणिक साझेदारी उत्तराखंड के शोधार्थियों और विद्वानों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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