July 8, 2026 8:13 PM

मानसून अलर्ट: बांधों से पानी छोड़ने से पहले प्रभाव का आकलन होगा अनिवार्य, CM ने दिये निर्देश

देहरादून। मानसून के दौरान संभावित बाढ़ और जलभराव की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए राज्य सरकार ने सभी प्रमुख बांधों और बैराजों की निगरानी व्यवस्था को और सख्त कर दिया है। अब सभी बांध एवं बैराज प्रबंधन को प्रतिदिन सुबह 8 बजे और शाम 8 बजे अपने जलाशयों के जलस्तर, इनफ्लो, आउटफ्लो और डिस्चार्ज की अद्यतन रिपोर्ट उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) को भेजनी होगी। साथ ही, यदि किसी बांध या बैराज से पानी छोड़ा जाना है तो उससे पहले डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का भी विस्तृत आकलन साझा करना अनिवार्य होगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने यूएसडीएमए स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि पानी छोड़ने से पहले राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र और संबंधित जिला प्रशासन को समय से सूचना उपलब्ध कराई जाए। सूचना में यह स्पष्ट किया जाए कि छोड़ा गया पानी कितने समय में किन क्षेत्रों तक पहुंचेगा, नदी के जलस्तर में कितनी वृद्धि होगी और किन इलाकों में इसका संभावित प्रभाव पड़ सकता है, ताकि समय रहते लोगों को सतर्क कर आवश्यक एहतियाती कदम उठाए जा सकें।

बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि सभी बांध और जल विद्युत परियोजनाएं नदी जलस्तर सेंसर, डिस्चार्ज मॉनिटरिंग सिस्टम और अन्य पूर्व चेतावनी प्रणालियों से प्राप्त आंकड़ों को एपीआई के माध्यम से रियल टाइम में यूएसडीएमए के साथ साझा करें। इसके साथ ही परियोजनाओं को ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन और अर्ली वार्निंग सिस्टम का विस्तार करने के निर्देश दिए गए। टिहरी हाइड्रो पावर कॉरपोरेशन को अपने क्षेत्र में ऑटोमैटिक वेदर स्टेशनों की संख्या बढ़ाकर 25 करने को कहा गया है।

सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि एक ही नदी तंत्र में स्थित अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम बांधों तथा बैराजों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है। सभी परियोजनाएं जलस्तर, वर्षा और डिस्चार्ज संबंधी सूचनाओं का नियमित आदान-प्रदान करें, जिससे किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

बैठक में अधिकारियों ने डिस्चार्ज सायरन, चेतावनी उपकरणों और विभिन्न सेंसरों की नियमित जांच करने, तकनीकी खामियों को तत्काल दूर करने तथा बाढ़ संभावित क्षेत्रों में आवश्यक मशीनरी और उपकरणों की अग्रिम तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। साथ ही जल निकासी व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया, ताकि भारी वर्षा के दौरान आबादी वाले क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति से बचा जा सके।

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