September 23, 2026 6:24 PM

ज्योलिकोट दूषित पेयजल मामले में मुख्य सचिव सख्त, लापरवाही पर कार्रवाई के निर्देश

देहरादून। नैनीताल के ज्योलिकोट में दूषित पेयजल की घटना को लेकर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर पूरे मामले की समीक्षा की। उन्होंने घटना पर कड़ी नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया कि पेयजल की गुणवत्ता और जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आने पर विभागाध्यक्षों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

15 दिन में पेयजल योजनाओं का होगा भौतिक सत्यापन

मुख्य सचिव ने प्रदेशभर की प्रमुख पेयजल योजनाओं की भौगोलिक मानचित्रण और भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए। अगले 15 दिनों में स्रोत, भंडारण टैंक, पाइपलाइन, सीवर लाइन, क्रॉसिंग प्वाइंट और उपभोक्ता छोर पर संभावित रिसाव की जांच की जाएगी। पानी की गुणवत्ता, क्लोरीनेशन, टैंकों की सफाई और कॉलीफॉर्म समेत आवश्यक मानकों की जांच का नियमित अभिलेख भी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

पेयजल-सीवर लाइनों की जांच के लिए बनेगी एसओपी

मुख्य सचिव ने पेयजल और सीवरेज लाइनों की जांच के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया तैयार कर उसका कड़ाई से पालन कराने को कहा। उन्होंने अधिकारियों से यह भी जांचने को कहा कि पहले से जारी व्यवस्था के बावजूद कहीं पेयजल दूषित होने की स्थिति क्यों उत्पन्न हुई और जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करेगा नियमित पानी की जांच

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रमुख शहरों में नियमित पेयजल गुणवत्ता जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही सीवरेज शोधन संयंत्रों का औचक निरीक्षण भी कराया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग को दूषित पेयजल की घटना सामने आने पर तत्काल स्वास्थ्य टीम भेजने और अगले 15 दिनों में प्रदेशभर में आवश्यक स्वास्थ्य निगरानी एवं जांच सुनिश्चित करने को कहा गया है।

फील्ड नेटवर्क को बनाया जाएगा सूचना तंत्र

मुख्य सचिव ने कहा कि शिक्षक, पटवारी, ग्राम पंचायत अधिकारी और ट्यूबवेल संचालक समेत फील्ड स्तर के कार्मिकों के नेटवर्क का प्रभावी उपयोग किया जाए। इसके लिए स्थायी सूचना और प्रतिक्रिया तंत्र विकसित किया जाएगा, ताकि पेयजल या स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी समस्या की जानकारी तत्काल मिल सके।

उन्होंने जिला स्तर की समितियों को केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित न रहने और जमीनी अधिकारियों से नियमित सूचना लेने के निर्देश दिए। पुराने पाइपलाइन नेटवर्क और संवेदनशील स्थलों की जानकारी जुटाने के लिए सेवानिवृत्त लाइनमैन और लंबे समय तक फील्ड में काम कर चुके अनुभवी कार्मिकों की सेवाएं लेने पर भी जोर दिया।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी तय होगी और भविष्य में इस प्रकार की घटना होने पर लापरवाही मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में सचिव डॉ. रणवीर सिंह चौहान, डॉ. वी. षणमुगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डीके सिंह और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।