देहरादून। बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल की आगामी फिल्म ‘सूर्या’ रिलीज से पहले विवादों में आ गई है। डॉक्टर, अस्पताल और मरीज की कहानी पर आधारित इस फिल्म को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की देहरादून शाखा ने आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि किसी एक चिकित्सक की कथित गलतियों के आधार पर पूरे चिकित्सक समुदाय की छवि को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है। चिकित्सा क्षेत्र में अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इसके साथ ईमानदारी से सेवाएं देने वाले चिकित्सकों के सम्मान और सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाना जरूरी है।
आईएमए देहरादून के मुताबिक, फिल्म में एक पिता अपनी बेटी के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचता है और डॉक्टर पर भगवान के समान भरोसा करता है। इसके बाद उसे कथित तौर पर अतिरिक्त जांच, पांच लाख रुपये के बिल और कमीशनखोरी जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। संगठन का कहना है कि यदि किसी अस्पताल या चिकित्सक द्वारा अनावश्यक जांच कराकर मरीज का आर्थिक शोषण किया जाता है, तो मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि, किसी एक मामले को इस तरह प्रस्तुत करना कि पूरा चिकित्सक समुदाय ही भ्रष्ट है, उचित नहीं है।
आईएमए ने स्पष्ट किया कि चिकित्सा क्षेत्र में गलत काम करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी और नियमानुसार कार्रवाई का संगठन समर्थन करता है। लेकिन किसी एक चिकित्सक के कृत्य के लिए पूरे पेशे को कठघरे में खड़ा करना सही नहीं है। संगठन के अनुसार, चिकित्सक भी समाज का हिस्सा हैं और दिन-रात मरीजों के उपचार में जुटे रहते हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में वे अपनी व्यक्तिगत और पारिवारिक जिम्मेदारियों को पीछे छोड़कर मरीजों की जान बचाने का प्रयास करते हैं। कई बार सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों में भी अपनी सेवाएं देते हैं।
डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा पर भी जताई चिंता
आईएमए ने अस्पतालों में चिकित्सकों के साथ होने वाली गाली-गलौज, धमकी और शारीरिक हिंसा की घटनाओं पर भी चिंता जताई। संगठन का कहना है कि उपचार के परिणाम को लेकर नाराजगी या अधूरी जानकारी के आधार पर कई बार चिकित्सकों के साथ आक्रामक व्यवहार किया जाता है। ऐसे में यदि फिल्मों और अन्य माध्यमों से डॉक्टरों की छवि केवल मरीजों का शोषण करने वाले व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत की जाती है, तो इससे डॉक्टर और मरीज के बीच अविश्वास बढ़ सकता है। संगठन ने कहा कि चिकित्सा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और मरीजों के अधिकारों का सम्मान जरूरी है, लेकिन चिकित्सकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
रचनात्मक स्वतंत्रता के साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी जरूरी
आईएमए देहरादून ने कहा कि सिनेमा का समाज की सोच और व्यवहार पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में चिकित्सा जैसे संवेदनशील विषयों पर फिल्म बनाते समय तथ्यों, संतुलन और सामाजिक जिम्मेदारी का ध्यान रखा जाना चाहिए। संगठन ने स्पष्ट किया कि किसी वास्तविक अनियमितता को दिखाने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि गलत आचरण कुछ व्यक्तियों का हो सकता है, पूरे पेशे का नहीं।
मरीजों के अधिकार और चिकित्सकों की सुरक्षा दोनों जरूरी
संगठन ने कहा कि वह मरीजों के अधिकारों के साथ खड़ा है और चिकित्सा क्षेत्र में भ्रष्टाचार या अनियमितताओं को किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराता। मरीजों और उनके परिजनों की शिकायतों को गंभीरता से लेकर निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, किसी शिकायत के आधार पर पूरे चिकित्सक समुदाय को दोषी मानना भी उचित नहीं है। डॉक्टर और मरीज एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि चिकित्सा व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं, जिनका साझा उद्देश्य मरीज का स्वास्थ्य और जीवन बचाना है।
आईएमए की अपील—नफरत नहीं, भरोसा बढ़ाने की जरूरत
आईएमए देहरादून ने फिल्म निर्माताओं, कलाकारों, मीडिया और समाज से अपील की कि चिकित्सा जैसे संवेदनशील विषयों को प्रस्तुत करते समय तथ्यों और जिम्मेदारी का ध्यान रखा जाए। संगठन के अनुसार, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है, लेकिन ईमानदारी से काम करने वाले चिकित्सकों का सम्मान भी बना रहना चाहिए। आईएमए ने कहा कि गलत चिकित्सक का विरोध होना चाहिए, लेकिन हर चिकित्सक को गलत नहीं ठहराया जाना चाहिए। मरीजों के अधिकारों की रक्षा के साथ चिकित्सकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि चिकित्सा व्यवस्था में विश्वास बना रहे और डॉक्टर बिना भय के अपनी जिम्मेदारियां निभा सकें।







