देहरादून। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की टिप्पणियों पर उत्तराखंड में भी प्रतिक्रिया सामने आई है। पूर्व सैन्य अधिकारियों और भाजपा नेताओं ने इन टिप्पणियों पर नाराजगी जताते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर जिम्मेदारी के साथ बयान देने की अपील की है। पूर्व मेजर जनरल सम्मी सबरवाल, पूर्व कमांडो शमशेर सिंह बिष्ट और कर्नल अजय कोठियाल ने अलग-अलग प्रतिक्रियाओं में कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बीच सेना और सुरक्षा एजेंसियों के मनोबल तथा संस्थाओं पर जनता के भरोसे का ध्यान रखा जाना चाहिए।
पूर्व मेजर जनरल सम्मी सबरवाल ने कहा कि राजनीतिक विरोधियों की आलोचना करना अलग बात है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पदों पर बैठे अधिकारियों को निशाना बनाते समय पद की मर्यादा का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे पदों पर बैठे अधिकारी हर राजनीतिक आरोप का सार्वजनिक रूप से जवाब नहीं दे सकते। उनके मुताबिक, राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के कामकाज पर सवाल उठाने और ऐसे बयान देने में अंतर है, जिनसे जनता के बीच भ्रम पैदा हो सकता है।
संस्थाओं पर भरोसे को लेकर उठाए सवाल
सबरवाल ने आरोप लगाया कि देश की संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जनता के भरोसे को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने वेनेजुएला का उदाहरण देते हुए कुछ देशों में चुनावी प्रक्रिया और संस्थाओं पर उठे सवालों के बाद पैदा हुई राजनीतिक अस्थिरता का उल्लेख किया। उन्होंने भारत में भी इसी तरह का माहौल बनाए जाने की आशंका जताई, हालांकि उनके इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
उन्होंने राहुल गांधी की ओर से पहले पेगासस मामले में उठाए गए सवालों का भी जिक्र किया। सबरवाल ने कहा कि किसी भी आरोप के समर्थन में तथ्य और प्रमाण होने चाहिए तथा आरोप लगाने वालों को जवाबदेही से बचना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर राजनीतिक बयानबाजी करते समय देश की सुरक्षा व्यवस्था और संस्थाओं पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखना जरूरी है।
सैन्य अभियानों पर सवाल उठाने को लेकर जताई नाराजगी
थर्ड पैराशूट रेजिमेंट में कमांडो रहे पूर्व सैनिक शमशेर सिंह बिष्ट ने सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसे सैन्य अभियानों पर उठने वाले सवालों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि सैनिकों की प्राथमिक जिम्मेदारी देश की रक्षा करना है। सीमा पर तैनात जवानों से हर सैन्य कार्रवाई के सबूत जुटाने की अपेक्षा नहीं की जा सकती।
बिष्ट के मुताबिक, सैन्य अभियानों पर चर्चा करते समय उन परिस्थितियों को भी समझना चाहिए, जिनमें जवान अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में राजनीतिक बहस के दौरान सैनिकों के दायित्वों और उनके सामने आने वाली चुनौतियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
कर्नल अजय कोठियाल ने भी राहुल गांधी की टिप्पणी पर उठाए सवाल
उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद के अध्यक्ष और भाजपा नेता कर्नल अजय कोठियाल ने भी अजीत डोभाल को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणियों को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों पर राजनीतिक विरोध हो सकता है, लेकिन नेताओं को तथ्यों और जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखनी चाहिए।
कोठियाल ने कहा कि डोभाल ने देश की सुरक्षा व्यवस्था में लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने वर्ष 2015 में म्यांमार में हुई सैन्य कार्रवाई, वर्ष 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, वर्ष 2019 की बालाकोट कार्रवाई और वर्ष 2025 के ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि सैन्य अभियानों में जवानों की बहादुरी के साथ खुफिया जानकारी, रणनीति और विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि क्या पार्टी के सभी नेता राहुल गांधी की टिप्पणी का समर्थन करते हैं। कोठियाल ने कहा कि कांग्रेस को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस विषय पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
उत्तराखंड में भी राजनीतिक प्रतिक्रिया
अजीत डोभाल का संबंध उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र से है। ऐसे में उन्हें लेकर दिए गए बयानों पर प्रदेश में भी राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है। भाजपा नेता एवं कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने राहुल गांधी की टिप्पणियों की आलोचना करते हुए इसे उत्तराखंड के स्वाभिमान से जोड़कर देखा और प्रदेश कांग्रेस के नेताओं से अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग की।
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस विवाद में एक ओर पूर्व सैन्य अधिकारी और भाजपा नेता राहुल गांधी की टिप्पणियों पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं व्यापक बहस राजनीतिक आलोचना के अधिकार, सुरक्षा संस्थाओं की जवाबदेही और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में सार्वजनिक बयानबाजी की सीमाओं पर केंद्रित है।








