October 30, 2026 1:47 PM

MLA उमेश कुमार के इस्तीफे के बाद खानपुर बनी 2027 की सियासी हॉट सीट…!

देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले हरिद्वार जिले की खानपुर विधानसभा सीट पर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। निर्दलीय विधायक उमेश कुमार के विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफे के ऐलान के बाद इस सीट को लेकर नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने खानपुर से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है, वहीं पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने भाजपा से खानपुर और लक्सर दोनों सीटों पर टिकट की दावेदारी पेश की है। दूसरी ओर उमेश कुमार ने कांग्रेस और भाजपा में शामिल होने की अटकलों को खारिज करते हुए अपनी जन निर्माण पार्टी को मजबूत करने और कई सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही है।

इन घटनाक्रमों ने खानपुर को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। यहां एक ओर पुराने सियासी टकराव की पृष्ठभूमि है तो दूसरी ओर नए राजनीतिक विकल्प और अलग-अलग दलों की चुनावी रणनीतियां सामने आ रही हैं।

इस्तीफे के पीछे उमेश कुमार की क्या है रणनीति?

खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने 28 अक्टूबर को विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने का ऐलान किया था। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा भी भेजा। उमेश कुमार ने आरोप लगाया कि पिछले चार वर्षों में किसानों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर उन्हें विपक्ष, खासकर कांग्रेस का अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।

उमेश कुमार का कहना है कि वह विपक्ष के आंदोलनों और विधानसभा में विरोध प्रदर्शनों के दौरान कांग्रेस के साथ खड़े रहे, लेकिन जब हरिद्वार के किसानों और स्थानीय समस्याओं को लेकर समर्थन की जरूरत पड़ी तो कांग्रेस ने साथ नहीं दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका कांग्रेस या भाजपा में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है।

उमेश कुमार के बयानों से संकेत मिल रहे हैं कि वह आगामी चुनाव में अपनी अलग राजनीतिक पहचान को आगे बढ़ाना चाहते हैं। वह अपनी जन निर्माण पार्टी को मजबूत करने और 2027 के चुनाव में आठ से दस सीटों पर उम्मीदवार उतारने की योजना भी जता चुके हैं। ऐसे में उनके इस्तीफे को केवल नाराजगी के तौर पर देखने के बजाय इसे उनकी आगामी राजनीतिक रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

हरीश रावत की दिलचस्पी से कांग्रेस में नई चर्चा

खानपुर की राजनीति में हलचल उस समय और बढ़ गई, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस सीट से 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की। रावत के मुताबिक, खानपुर के लोगों ने उनसे यहां से चुनाव लड़ने का आग्रह किया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम फैसला कांग्रेस नेतृत्व को करना है और पार्टी जहां से चुनाव लड़ने को कहेगी, वह उसके अनुसार निर्णय लेंगे।

रावत की इस इच्छा ने कांग्रेस के भीतर भी नई चर्चा शुरू कर दी है। अब सवाल है कि पार्टी खानपुर से उन्हें मैदान में उतारने पर विचार करेगी या किसी स्थानीय चेहरे को प्राथमिकता देगी। फिलहाल कांग्रेस की ओर से इस बारे में कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।

रावत की संभावित उम्मीदवारी की चर्चा के पीछे वर्ष 2016 का घटनाक्रम भी अहम माना जा रहा है। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत की सरकार से जुड़े स्टिंग ऑपरेशन के कारण उमेश कुमार राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आए थे। एक समय उमेश कुमार और हरीश रावत के बीच नेता और पत्रकार के तौर पर अच्छे संबंध थे, लेकिन स्टिंग ऑपरेशन के बाद दोनों के बीच दूरियां बढ़ गई थीं।

चैंपियन की दावेदारी से भाजपा में भी हलचल

खानपुर सीट पर भाजपा की ओर से पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने भी अपनी दावेदारी खुलकर सामने रखी है। चैंपियन ने खानपुर और लक्सर दोनों विधानसभा सीटों से भाजपा का टिकट मांगा है। खानपुर से उनका पुराना राजनीतिक जुड़ाव रहा है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उनकी पत्नी देवयानी सिंह भाजपा की उम्मीदवार थीं, लेकिन वह तीसरे स्थान पर रही थीं। उस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी उमेश कुमार ने जीत दर्ज की थी।

अब उमेश कुमार के इस्तीफे के बाद चैंपियन की दो सीटों पर दावेदारी से भाजपा के भीतर भी हलचल की चर्चा है। क्षेत्र में भाजपा की ओर से ओम प्रकाश जमदग्नि और लक्सर के पूर्व विधायक संजय गुप्ता भी चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे हैं।

उमेश कुमार और चैंपियन के पुराने टकराव पर भी नजर

वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक जानकार संजय आर्य के मुताबिक, उमेश कुमार और कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक टकराव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उमेश कुमार ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज कर चैंपियन परिवार के राजनीतिक वर्चस्व को चुनौती दी थी। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी और विवाद कई बार सुर्खियों में रहे।

संजय आर्य के अनुसार, जनवरी 2025 में दोनों पक्षों के बीच विवाद ने गंभीर रूप ले लिया था। गोलीबारी की घटना के बाद पुलिस कार्रवाई भी हुई थी। अब उमेश कुमार के विधानसभा की सदस्यता छोड़ने और चैंपियन के फिर से खानपुर से भाजपा का टिकट मांगने के बाद दोनों नेताओं की आगे की राजनीतिक रणनीति पर नजर रहेगी।

उनका कहना है कि पुराने विवादों का आगामी चुनाव पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका आकलन अभी जल्दबाजी होगी। चुनाव में स्थानीय विकास, किसानों की समस्याएं, रोजगार, क्षेत्रीय संपर्क और जनता के बीच उम्मीदवारों की सक्रियता जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहेंगे।

2022 के चुनाव में निर्दलीय उमेश कुमार ने दर्ज की थी जीत

खानपुर विधानसभा सीट के वर्ष 2022 के चुनाव परिणाम बताते हैं कि यहां मुकाबला केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच सीमित नहीं रहा। उमेश कुमार ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में 38,767 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। बहुजन समाज पार्टी के रविंद्र सिंह करीब 31,915 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे, जबकि भाजपा प्रत्याशी देवयानी सिंह तीसरे स्थान पर थीं।

इन नतीजों से खानपुर में स्थानीय राजनीतिक समीकरणों और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़ की अहमियत सामने आई थी।

उम्मीदवारों के ऐलान के बाद ही साफ होगी तस्वीर

उमेश कुमार के इस्तीफे के बाद खानपुर की राजनीति किस दिशा में जाएगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। हरीश रावत की चुनाव लड़ने की इच्छा, चैंपियन की भाजपा से टिकट की दावेदारी और उमेश कुमार की अलग राजनीतिक राह इस सीट के प्रमुख घटनाक्रम बन गए हैं।

हालांकि अभी कांग्रेस और भाजपा ने अपने उम्मीदवार तय नहीं किए हैं और उमेश कुमार की अगली चुनावी रणनीति भी पूरी तरह सामने नहीं आई है। ऐसे में संभावित मुकाबले को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। खानपुर की चुनावी तस्वीर दलों के उम्मीदवारों और उनकी रणनीतियों के औपचारिक ऐलान के बाद ही साफ हो सकेगी।

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