October 23, 2026 1:24 PM

उत्तराखंड SDRF को मिला ISO प्रमाण-पत्र, देश में पहली बार आपदा प्रतिवादन बल को मिली यह उपलब्धि

देहरादून। आपदा के दौरान लोगों की जान बचाने और दुर्गम क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान चलाने वाली उत्तराखंड राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बल को गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली के लिए आईएसओ 9001:2015 प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया है। इसके साथ ही उत्तराखंड एसडीआरएफ यह प्रमाण-पत्र हासिल करने वाला देश का पहला आपदा प्रतिवादन बल बन गया है।

यह उपलब्धि बल की व्यवस्थित कार्यप्रणाली, अनुशासन, प्रशिक्षण और मानक संचालन प्रक्रियाओं के पालन को दर्शाती है। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड में भूकंप, भूस्खलन, अतिवृष्टि, बादल फटने, बाढ़ और हिमस्खलन जैसी घटनाओं के दौरान एसडीआरएफ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहती है।

तीन दिन तक हुआ कार्यप्रणाली का निरीक्षण

एसडीआरएफ को प्रमाण-पत्र निर्धारित मानकों पर खरा उतरने के बाद मिला है। इसके लिए 23 से 25 सितंबर 2026 तक जौलीग्रांट स्थित एसडीआरएफ वाहिनी मुख्यालय में भारतीय मानक ब्यूरो की ओर से द्वितीय चरण का निरीक्षण किया गया। इस दौरान पूर्व वैज्ञानिक ‘जी’ एवं उप महानिदेशक विष्णु गुप्ता ने सेनानायक अर्पण यदुवंशी की मौजूदगी में बल की विभिन्न शाखाओं और कार्यप्रणालियों का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था, जवानों के प्रशिक्षण, संसाधनों के प्रबंधन, अभिलेखों के रखरखाव, गुणवत्ता प्रबंधन और मानक संचालन प्रक्रियाओं के पालन का मूल्यांकन किया गया। इसके बाद 8 अक्टूबर 2026 को बल को आईएसओ 9001:2015 प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया।

प्रदेशभर में 40 से अधिक टीमें रहती हैं तैयार

उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं और दुर्घटनाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों के लिए एसडीआरएफ की 40 से अधिक टीमें प्रदेशभर में चौबीसों घंटे तैयार रहती हैं। दुर्गम क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना, नदियों और नालों में खोज अभियान चलाना तथा दुर्घटनाओं में घायलों तक सहायता पहुंचाना बल की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।

एसडीआरएफ की भूमिका प्राकृतिक आपदाओं तक ही सीमित नहीं है। चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सहायता, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में फंसे पर्वतारोहियों और यात्रियों को सुरक्षित निकालने तथा धार्मिक आयोजनों और साहसिक पर्यटन गतिविधियों के दौरान भी बल की टीमें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाती हैं।

कार्यप्रणाली और जवाबदेही को मिलेगी मजबूती

आईएसओ प्रमाण-पत्र से बल की प्रशासनिक व्यवस्था, प्रशिक्षण, संसाधनों के उपयोग और उपकरणों के रखरखाव को निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप बनाए रखने में मदद मिलेगी। साथ ही कार्यों की समीक्षा, कमियों की पहचान और उनमें सुधार की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करने का अवसर मिलेगा। इससे भविष्य में राहत एवं बचाव अभियानों की तैयारी और संचालन को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एसडीआरएफ को यह उपलब्धि मिलने पर अधिकारियों और जवानों को बधाई दी। उन्होंने इसे प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताते हुए कहा कि यह बल की कार्यकुशलता, अनुशासन और गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि एसडीआरएफ आगे भी तत्परता और सेवाभाव के साथ लोगों की सुरक्षा में जुटी रहेगी।

पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ और पुलिस महानिरीक्षक एसडीआरएफ योगेंद्र सिंह रावत के मार्गदर्शन में सेनानायक अर्पण यदुवंशी के नेतृत्व में बल की कार्यप्रणाली, प्रशिक्षण और संसाधन प्रबंधन को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

Related Posts