September 23, 2026 6:24 PM

SIR पर सवालों के बीच चुनाव आयोग की सफाई, आठ बिंदुओं में पूरी बात बताई

नई दिल्ली। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की खबरों के बीच आयोग ने आठ बिंदुओं में अपना पक्ष रखा है। आयोग ने कहा है कि अलग-अलग राय और सुझाव निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक, पिछले एक साल में लिए गए फैसले पूरे आयोग की सहमति से लिए गए हैं।

1. संवैधानिक संस्था के रूप में तय प्रक्रिया के तहत काम

चुनाव आयोग ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324, संबंधित कानूनों और स्थापित संस्थागत परंपराओं के तहत काम करने वाली बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था है। लिखित टिप्पणियां, सुझाव, तकनीकी राय और आंतरिक जांच-व्यवस्था उसकी नियमित कार्यप्रणाली का हिस्सा हैं। इनका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, कानूनी अनुपालन और प्रशासनिक मजबूती सुनिश्चित करना है।

2. सभी आदेश और फैसले कानूनी रूप से मान्य

आयोग ने कहा कि उसके सभी आधिकारिक आदेश, फैसले और प्रशासनिक निर्देश कानूनी रूप से वैध हैं। ये मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और कार्यकाल से संबंधित वर्ष 2023 के कानून के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए जारी किए जाते हैं।

3. आयुक्तों के सुझाव सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया

आयोग के मुताबिक, किसी प्रक्रिया के प्रारूप तैयार करने के दौरान आयुक्तों की ओर से उठाए गए सवाल और दिए गए सुझाव सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इनका उद्देश्य मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया को और बेहतर बनाना है। आयोग ने कहा कि ऐसे सुझावों को फैसले में मतभेद के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

4. अलग-अलग राय होना सामान्य बात

आयोग ने कहा कि किसी भी संस्था में अलग-अलग विचार और सुझाव आना सामान्य है। अंतिम फैसला लेने से पहले विचार-विमर्श निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा होता है। आयोग के अनुसार, केवल मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त ही नहीं, बल्कि आयोग का प्रत्येक अधिकारी चुनाव व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सुझाव दे सकता है।

5. चुनिंदा आंतरिक टिप्पणियों से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती

आयोग ने कहा कि दस महीने की अवधि में सामने आए कुछ चुनिंदा आंतरिक नोट और टिप्पणियों को आधार बनाकर पूरी प्रक्रिया का आकलन करना सही तस्वीर नहीं दिखाता। आयोग के अनुसार, इसी अवधि में कई फैसले लिए गए, निर्देश जारी किए गए और करीब 40 नई पहल शुरू की गईं। इनमें एसआईआर समेत मतदाता सूची पुनरीक्षण और अन्य चुनावी सुधार शामिल हैं। आयोग ने कहा कि ये फैसले पिछले एक साल में पूरे आयोग की सहमति से लिए गए हैं।

6. कई बड़े चुनावों की प्रक्रिया का दिया हवाला

आयोग ने कहा कि हाल में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में बड़े चुनाव और चुनाव से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाएं पूरी की गईं। आयोग के अनुसार, इन चुनावों के संचालन में बड़े स्तर पर प्रशासनिक और तकनीकी व्यवस्था के साथ आयोग की कई मंजूरियां और निर्देश शामिल रहे।

7. डिजिटल मंचों की सुरक्षा का दावा

आयोग ने कहा कि उसके डिजिटल मंच, जिनमें ईसीआईनेट भी शामिल है, कड़े आंकड़ा सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं। अनधिकृत हस्तक्षेप और हेरफेर रोकने के लिए तकनीकी सुरक्षा जांच, लेखा-परीक्षण और साइबर सुरक्षा उपाय लागू हैं। मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का काम निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों और जिला निर्वाचन अधिकारियों को कानून के तहत प्राप्त अधिकारों के अनुसार करना होता है।

8. संवैधानिक जिम्मेदारी पूरी करने के लिए प्रतिबद्ध

आयोग ने अंतिम बिंदु में कहा कि वह अपने संवैधानिक दायित्वों को पूरी ईमानदारी के साथ निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। आयोग ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वह चुनाव प्रक्रिया को मजबूत और विश्वसनीय बनाए रखने के लिए काम करता रहेगा।

रिपोर्ट के बाद उठा था विवाद

अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद एसआईआर और चुनाव आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे थे। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि कुछ मामलों में दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद फैसले आगे बढ़ाए गए और दस महीनों के दौरान कई बार आपत्तियां दर्ज की गईं।

आयोग ने अपने आठ बिंदुओं के स्पष्टीकरण में कहा है कि एसआईआर समेत उसके सभी फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की मंजूरी के साथ लिए गए हैं।