September 19, 2026 7:34 PM

विधायक निधि खर्च में पीछे पहाड़, मैदान आगे, कांग्रेस विधायकों का औसत भाजपा से ज्यादा

देहरादून। उत्तराखंड में विधायक निधि के इस्तेमाल को लेकर सामने आए आंकड़े प्रदेश के पहाड़ और मैदान के बीच खर्च की रफ्तार में अंतर दिखा रहे हैं। ग्राम्य विकास आयुक्त कार्यालय से सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022-23 से जून 2026 तक विधायकों के लिए उपलब्ध 1,664 करोड़ रुपये की निधि में से करीब 1,091.29 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। यानी लगभग 66 प्रतिशत निधि का ही उपयोग हो पाया है।

आंकड़ों के अनुसार, पहाड़ी जिलों के विधायकों ने औसतन 14.74 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के मैदानी क्षेत्रों के विधायकों का औसत खर्च 16.88 करोड़ रुपये रहा। देहरादून और नैनीताल के मिश्रित जिलों में यह औसत 15.77 करोड़ रुपये रहा। पहाड़ी क्षेत्रों में कुल खर्च दर करीब 62 प्रतिशत, मिश्रित जिलों में 66.4 प्रतिशत और मैदानी क्षेत्रों में 71.1 प्रतिशत दर्ज की गई है।

कांग्रेस विधायकों का खर्च प्रतिशत अधिक

मौजूदा राजनीतिक संबद्धताओं के आधार पर विधायकवार खर्च प्रतिशत का साधारण औसत कांग्रेस विधायकों के लिए 68.4 प्रतिशत और भाजपा विधायकों के लिए 64.4 प्रतिशत दर्ज किया गया है। यानी इस आधार पर कांग्रेस विधायकों का औसत खर्च प्रतिशत करीब चार प्रतिशत अंक अधिक है। हालांकि यह विधायकवार प्रतिशतों का साधारण औसत है, इसे दोनों दलों की कुल निधि की भारित खर्च दर नहीं माना जा सकता।

77 प्रतिशत खर्च के साथ दो विधायक आगे

आंकड़ों में रुड़की के भाजपा विधायक प्रदीप बत्रा और पिरान कलियर के कांग्रेस विधायक फुरकान अहमद 77 प्रतिशत खर्च के साथ सबसे ऊंचे स्तर पर दर्ज हैं। इसके बाद कांग्रेस के रवि बहादुर और काजी निजामुद्दीन 76 प्रतिशत के स्तर पर हैं। भाजपा के महेश जीना और कांग्रेस के मदन सिंह बिष्ट का खर्च प्रतिशत 75 प्रतिशत दर्ज किया गया है।

कांग्रेस विधायकों में रवि बहादुर, काजी निजामुद्दीन, अनुपमा रावत, ममता राकेश और वीरेंद्र कुमार समेत कई विधायक अपेक्षाकृत ऊंचे खर्च प्रतिशत वाले क्षेत्रों में हैं। वहीं भाजपा में प्रदीप बत्रा के अलावा राजकुमार पोरी, सतपाल महाराज, खजान दास और गणेश जोशी सहित कई विधायक 60 प्रतिशत से अधिक खर्च वाले क्षेत्रों में हैं।

कुछ क्षेत्रों में खर्च 60 प्रतिशत से भी कम

विधायक निधि खर्च में सबसे कम प्रतिशत टिहरी विधानसभा क्षेत्र का करीब 30 प्रतिशत दर्ज किया गया है। यमकेश्वर में 44 प्रतिशत, चकराता में 51 प्रतिशत, कपकोट में 52 प्रतिशत और चंपावत में 53 प्रतिशत खर्च दर्ज है। कई अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी खर्च 60 प्रतिशत से नीचे है।

कैबिनेट मंत्रियों की विधानसभा सीटों के आंकड़ों में प्रदीप बत्रा 77 प्रतिशत खर्च के साथ आगे हैं। सौरभ बहुगुणा ने 72 प्रतिशत, मदन कौशिक ने 70 प्रतिशत, सतपाल महाराज ने 68 प्रतिशत, खजान दास ने 66 प्रतिशत और गणेश जोशी ने 65 प्रतिशत निधि खर्च की है। वहीं राम सिंह कैड़ा 62 प्रतिशत और रेखा आर्या 60 प्रतिशत पर हैं। सुबोध उनियाल और भरत सिंह चौधरी 57-57 प्रतिशत तथा धन सिंह रावत 37 प्रतिशत खर्च के साथ 60 प्रतिशत से नीचे हैं।

पहाड़ में कम खर्च के कारणों पर अलग से अध्ययन जरूरी

आंकड़ों से यह जरूर सामने आता है कि पहाड़ी क्षेत्रों में विधायक निधि खर्च की रफ्तार मैदान की तुलना में कम है, लेकिन सूचना के अधिकार से मिले दस्तावेज इसके कारणों का विश्लेषण नहीं करते। पर्वतीय क्षेत्रों में भौगोलिक परिस्थितियां, प्रशासनिक प्रक्रियाएं, कार्यस्थलों तक पहुंच और परियोजनाओं की प्रकृति जैसे अलग-अलग कारक खर्च की रफ्तार को प्रभावित कर सकते हैं।

वरिष्ठ पत्रकार नीरज कोहली ने विधायक निधि के उपयोग पर चिंता जताते हुए कहा कि वर्ष 2002 में विधायक निधि 75 लाख रुपये थी, जो अब बढ़कर पांच करोड़ रुपये सालाना हो चुकी है। उनके अनुसार, सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायक निधि बढ़ाने की मांग करते हैं, लेकिन उपलब्ध राशि को प्रभावी ढंग से खर्च करने की क्षमता में कमी दिखाई देती है।

उन्होंने कहा कि विधायक निधि का सही और पूरा उपयोग सत्ता तथा विपक्ष दोनों के विधायकों की जिम्मेदारी है। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में इसका प्रभावी इस्तेमाल जरूरी है, ताकि बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों को गति मिल सके तथा राज्य गठन की मूल अवधारणा के अनुरूप पहाड़ों का विकास हो सके।