August 29, 2026 7:59 PM

दून अस्पताल फिर चर्चाओं में, नवजात बदलने का आरोप; परिजनों ने मांगा डीएनए परीक्षण

देहरादून। दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय एक बार फिर विवादों के घेरे में है। एक परिवार ने अस्पताल के कर्मचारियों पर नवजात बच्चा बदलने का गंभीर आरोप लगाया है। परिजनों का दावा है कि प्रसव के बाद उन्हें बेटे की जगह बेटी सौंप दी गई। मामले की स्थिति स्पष्ट करने के लिए परिजनों ने बच्चे का डीएनए परीक्षण कराने की मांग की है।

शनिवार को स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल दून अस्पताल के निरीक्षण के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान परिजनों ने मंत्री के सामने अपनी शिकायत रखी और पूरे मामले की जांच के साथ डीएनए परीक्षण कराने की मांग की। मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने मौके पर ही चिकित्सा शिक्षा निदेशक को जांच के निर्देश दिए।

परिजन सुमित कुमार के अनुसार उनकी पत्नी का गर्भावस्था के दौरान दून अस्पताल में उपचार चल रहा था। प्रसव का समय नजदीक आने पर उन्हें 22 अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों ने शुरुआत में सामान्य प्रसव की बात कही, लेकिन दो दिन बाद 24 अगस्त को बताया गया कि सामान्य प्रसव संभव नहीं है और शल्यक्रिया करनी पड़ेगी।

सुमित का आरोप है कि सहमति के बाद उनकी पत्नी को शल्यक्रिया के लिए ले जाया गया। इस दौरान परिजनों ने अंदर जाकर स्थिति देखने की कोशिश की, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं दी गई। उनका कहना है कि ऑपरेशन के बाद नवजात को उनकी पत्नी को भी नहीं दिखाया गया। इसके बाद उन्हें एक कागज दिया गया, जिसमें नवजात का लिंग पुरुष दर्ज था।

परिजनों का आरोप है कि जब उन्हें नवजात सौंपा गया तो वह लड़का नहीं, बल्कि लड़की थी। इसके बाद उन्होंने अस्पताल प्रशासन से सीसीटीवी फुटेज दिखाने और मामले की जांच कराने की मांग की, लेकिन उनकी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई। परिवार का कहना है कि वे लगातार डीएनए परीक्षण की मांग कर रहे हैं, ताकि बच्चे को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।

वहीं, स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि मामले में भ्रम की स्थिति है, जिसे दूर किया जाना जरूरी है। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा निदेशक को पूरे प्रकरण की जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही जरूरत पड़ने पर डीएनए परीक्षण कराने की बात भी कही है।

मंत्री ने कहा कि कई बार गलतफहमियों के कारण माहौल खराब होता है और इससे अस्पताल की छवि भी प्रभावित होती है। इसलिए जांच के माध्यम से यह स्पष्ट होना चाहिए कि मामला केवल गलतफहमी का है या वास्तव में कोई गड़बड़ी हुई है।

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