August 26, 2026 3:43 PM

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने दिए निर्देश, हर जिले में होगा विशेष उत्सव; स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर जोर

देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने मंगलवार को सचिवालय में वन डिस्ट्रिक्ट वन फेस्टिवल और उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने को लेकर जिलाधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने सभी जिलों को अपने विशिष्ट पर्व, मेले, संस्कृति और स्थानीय उत्पादों को देश-दुनिया में पहचान दिलाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रत्येक जिले के किसी एक प्रमुख पर्व या मेले को वन डिस्ट्रिक्ट वन फेस्टिवल के रूप में विकसित किया जाए। इसके लिए जिलेवार वार्षिक आयोजन कैलेंडर तैयार करने के साथ स्थानीय लोगों, हितधारकों और प्रवासी उत्तराखंडियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि मेलों और उत्सवों को स्थायी स्वरूप देकर उनकी ब्रांड पहचान विकसित करना जरूरी है, ताकि आने वाले वर्षों में ये आयोजन प्रदेश की पहचान बन सकें। उन्होंने चमोली के रम्माण उत्सव और उत्तरकाशी के बटर उत्सव जैसे विशिष्ट आयोजनों को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने के निर्देश दिए।

इसके अलावा पौड़ी और चमोली के शरदोत्सव, हरिद्वार महोत्सव, नैनीताल विंटर कार्निवल और मसूरी विंटर कार्निवल को अधिक आकर्षक और व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया गया। चंपावत के अंतरराष्ट्रीय एंगलिंग मीट को वैश्विक पहचान दिलाने और उत्तरायणी मेले में साहसिक गतिविधियों को बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए।

निर्यात संवर्धन के लिए बनेगी स्थायी समिति

मुख्य सचिव ने जिलावार निर्यात की संभावनाओं की समीक्षा करते हुए प्रत्येक जिले का आधारभूत आंकड़ा तैयार करने और उसके आधार पर निर्यात संवर्धन की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रमुख सचिव नियोजन की अध्यक्षता में स्थायी समिति गठित करने को कहा। समिति में उद्योग, वन, आयुष समेत संबंधित विभागों के अधिकारियों और हितधारकों को शामिल किया जाएगा।

स्थानीय उत्पादों की पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर जोर

मुख्य सचिव ने स्थानीय उत्पादों की पहचान कर उनकी प्रसंस्करण, पैकेजिंग, गुणवत्ता, ब्रांडिंग और विपणन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की संभावनाओं का अधिकतम उपयोग किया जाए और प्रत्येक जिले के प्रमुख उत्पाद की विशिष्ट पहचान विकसित की जाए।

उन्होंने जिलाधिकारियों से कहा कि एक जिले में किए जा रहे सफल प्रयोगों और अच्छी पहलों को दूसरे जिलों के साथ साझा किया जाए। उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक आयोजनों को स्थानीय बाजार तक सीमित रखने के बजाय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के लिए विभागों को समन्वित प्रयास करने होंगे।

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