देहरादून। उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत फॉर्म-7 को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि चुनिंदा मतदाताओं, विशेषकर उसके समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे चुनाव आयोग की नियमित प्रक्रिया बताया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार एसआईआर के दूसरे चरण में करीब 19.04 लाख मतदाताओं को रिकॉर्ड में पाई गई विसंगतियों के कारण नोटिस जारी किए गए हैं। अब तक लगभग 19 लाख नोटिस बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंचाए जा चुके हैं। वहीं आयोग को अब तक फॉर्म-6 के 93 हजार, फॉर्म-7 के 1.39 लाख और फॉर्म-8 के 40 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने कहा कि फॉर्म-7 के सभी मामलों में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) स्तर पर नियमों के अनुसार जांच और सत्यापन किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी मतदाता का नाम नियमानुसार सुनवाई और जांच के बिना नहीं हटाया जाएगा।
कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री (संगठन) राजेंद्र सिंह भंडारी ने आरोप लगाया कि फॉर्म-7 के माध्यम से सुनियोजित तरीके से कांग्रेस समर्थक मतदाताओं के नाम हटाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि पार्टी विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में ऐसे मामलों की निगरानी कर रही है और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी करेगी।
वहीं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी ने कहा कि नोटिस केवल दस्तावेजों के सत्यापन के लिए भेजे गए हैं और पात्र मतदाताओं के नाम नहीं काटे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिनके दस्तावेज सही होंगे, उनका नाम मतदाता सूची में सुरक्षित रहेगा।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता कुंदन परिहार ने कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एसआईआर पूरी तरह चुनाव आयोग की प्रक्रिया है और भाजपा का इससे कोई संबंध नहीं है। दूसरी ओर कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने कहा कि लाखों मतदाताओं को नोटिस जारी होना चिंता का विषय है और सरकार तथा चुनाव आयोग को पूरी पारदर्शिता के साथ प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।
इधर, कांग्रेस विधायक भुवन चंद्र कापड़ी ने खटीमा विधानसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में फॉर्म-7 दाखिल किए जाने के मामले की जांच की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि फर्जी आपत्तियां साबित होती हैं तो कांग्रेस आंदोलन के साथ कानूनी कार्रवाई भी करेगी।
फिलहाल एसआईआर प्रक्रिया को लेकर प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। चुनाव आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमानुसार, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पूरी की जाएगी।






