नई दिल्ली/नैनीताल। रूस से भारत आ रहे एक तेल टैंकर के भारतीय कप्तान को ब्रिटेन में गिरफ्तार किए जाने का मामला सामने आया है। उत्तराखंड के नैनीताल निवासी 38 वर्षीय अजय पंत पर ब्रिटिश अधिकारियों ने रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। वहीं उनके परिवार ने भारत सरकार से हस्तक्षेप कर सुरक्षित रिहाई और स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने की मांग की है।
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक अजय पंत को 14 जून को ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी (NCA) और रॉयल मरीन द्वारा एमवी स्मिर्टोस नामक तेल टैंकर पर कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि जहाज प्रतिबंधित रूसी तेल की ढुलाई कर रहा था और बिना वैध राष्ट्रीय ध्वज के ब्रिटिश समुद्री क्षेत्र में प्रवेश किया था।
16 जून को अजय पंत को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया। अभियोजन पक्ष का दावा है कि उन्होंने रूस से प्रतिबंधित तेल की आपूर्ति या परिवहन में भूमिका निभाई है। हालांकि बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में कहा कि जहाज के गंतव्य और माल संबंधी निर्णय कंपनी स्तर पर लिए जाते हैं तथा अजय पंत केवल अपने पेशेवर दायित्वों का निर्वहन कर रहे थे।
मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई को होगी। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो अजय पंत को अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा हो सकती है।
इधर उत्तराखंड सरकार ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए विदेश मंत्रालय से हस्तक्षेप का अनुरोध किया है। गृह सचिव शैलेश बगोली ने बताया कि केंद्र सरकार को पत्र भेजकर अजय पंत की रिहाई और भारत वापसी में सहायता मांगी गई है। दिल्ली स्थित राज्य के क्षेत्रीय आयुक्त भी इस संबंध में केंद्र सरकार के अधिकारियों के संपर्क में हैं।
अजय पंत की पत्नी रितु पंत ने कहा कि उन्हें अपने पति की गिरफ्तारी की जानकारी सोशल मीडिया और विदेशी मीडिया रिपोर्टों से मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक न तो ब्रिटिश प्रशासन और न ही भारतीय अधिकारियों की ओर से परिवार को कोई आधिकारिक सूचना दी गई है। उन्होंने कहा कि उनके पति का 15 वर्षों से अधिक का समुद्री करियर पूरी तरह बेदाग रहा है और वे केवल कंपनी के निर्देशों के अनुसार कार्य कर रहे थे।
बताया जा रहा है कि एमवी स्मिर्टोस जहाज रूस के उस्त-लुगा बंदरगाह से करीब 1.01 लाख टन कच्चा तेल लेकर गुजरात के सिक्का बंदरगाह की ओर आ रहा था। जहाज पर भारत और जॉर्जिया के 24 अन्य चालक दल के सदस्य भी मौजूद हैं, जो फिलहाल पोत पर ही हैं।
ब्रिटेन की इस कार्रवाई को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ब्रिटिश सरकार का दावा है कि यह जहाज रूस के तथाकथित “शैडो फ्लीट” का हिस्सा है, जिसके माध्यम से प्रतिबंधों के बावजूद रूसी तेल का निर्यात किया जाता है। वहीं अजय पंत के परिवार और उत्तराखंड सरकार को उम्मीद है कि भारतीय कूटनीतिक प्रयासों से उन्हें जल्द राहत मिल सकेगी।






