May 10, 2026 4:00 PM

भाजपा में उभर रही युवा नेतृत्व की नई पीढ़ी, धामी-योगी समेत कई चेहरे बने पार्टी की ताकत

देहरादून। देश की राजनीति में जहां कई दल अब भी पारंपरिक नेतृत्व पर निर्भर दिखाई देते हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी लगातार युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। जेन-जी दौर की नई राजनीतिक सोच और युवा आकांक्षाओं के बीच भाजपा ने विभिन्न राज्यों में युवा चेहरों को जिम्मेदारी देकर नई राजनीतिक जमीन तैयार की है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी जैसे चेहरे भाजपा की नई पीढ़ी के प्रभावशाली नेताओं के रूप में उभरकर सामने आए हैं। पार्टी इन नेताओं को केवल प्रशासनिक चेहरों के रूप में नहीं, बल्कि मजबूत जनाधार वाले स्टार प्रचारकों के रूप में भी प्रस्तुत कर रही है।

युवा नेतृत्व पर भाजपा का भरोसा

भाजपा की रणनीति में युवाओं को राजनीति से जोड़ना प्रमुख प्राथमिकता बनती जा रही है। पार्टी का मानना है कि नई पीढ़ी के नेता जनसरोकारों, तेज फैसलों और आक्रामक राजनीतिक शैली के जरिए युवाओं के बीच बेहतर संवाद स्थापित कर पा रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भाजपा शासित राज्यों में अपेक्षाकृत कम उम्र के मुख्यमंत्रियों को आगे कर पार्टी ने एक नया संदेश देने का प्रयास किया है। इन राज्यों में भाजपा के कई मुख्यमंत्री 60 वर्ष से कम आयु के हैं, जिनमें उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी भी प्रमुख चेहरों में शामिल हैं।

उत्तराखंड में धामी बने स्थिर नेतृत्व का चेहरा

उत्तराखंड में वर्ष 2021 में अपेक्षाकृत युवा चेहरे के रूप में पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री बनाया गया था। इसके बाद पार्टी ने लगातार उन पर भरोसा कायम रखा। राजनीतिक तौर पर अस्थिरता झेल चुके उत्तराखंड में धामी सरकार को भाजपा स्थिर नेतृत्व और निर्णायक फैसलों की पहचान के रूप में प्रस्तुत करती रही है।

वहीं उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ का नेतृत्व भाजपा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा चेहरा बन चुका है। असम में हिमंता बिस्वा सरमा और पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी भी पार्टी की आक्रामक राजनीतिक रणनीति के अहम हिस्से माने जा रहे हैं।

कई राज्यों में युवा मुख्यमंत्री संभाल रहे जिम्मेदारी

भाजपा शासित राज्यों में कई ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिनकी उम्र 60 वर्ष से कम है। इनमें पुष्कर सिंह धामी, योगी आदित्यनाथ, देवेंद्र फडणवीस, नायब सिंह सैनी, प्रमोद सावंत और पेमा खांडू जैसे नाम प्रमुख हैं। पार्टी इसे नई पीढ़ी के नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति के रूप में देख रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भाजपा युवा नेतृत्व को और अधिक प्रमुखता देकर राष्ट्रीय राजनीति में लंबी रणनीति पर काम कर सकती है।

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