देहरादून: चारधाम यात्रा 2026 को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने ऐतिहासिक पहल शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त निर्देश दिए हैं कि यात्रा मार्ग पर प्लास्टिक के उपयोग को पूरी तरह हतोत्साहित किया जाए और कूड़ा फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके लिए ड्रोन के जरिए कूड़ा और प्लास्टिक वेस्ट की निगरानी की जाएगी, साथ ही अत्याधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पूरे प्रदेश में “मनी बैक” प्लास्टिक योजना लागू की जाए और हर दुकान पर प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट अनिवार्य किया जाए। प्लास्टिक बोतलों के उपयोग को कम करने के लिए यात्रा मार्ग पर जगह-जगह वाटर एटीएम और RO प्लांट लगाए जाएंगे, ताकि श्रद्धालुओं को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके।
यात्रा मार्ग पर सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर पर्यावरण मित्रों और विशेष मैनपावर की तैनाती की गई है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तहत 37 एमआरएफ सेंटर, 299 कम्पोस्ट पिट, 38 प्लास्टिक कम्पैक्टर मशीनें और 266 कचरा परिवहन वाहन तैनात किए गए हैं, जिससे कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सार्वजनिक शौचालयों का विस्तार किया गया है, जिसमें महिलाओं, पुरुषों और दिव्यांगजनों के लिए अलग-अलग सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा 74 मोबाइल शौचालय इकाइयों की भी व्यवस्था की गई है। यात्रा के दौरान वाहनों के दबाव को देखते हुए हजारों पार्किंग स्थल चिन्हित किए गए हैं, जबकि ठहरने के लिए होटल, धर्मशाला और आश्रमों में हजारों कमरों और बिस्तरों की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
चारधाम यात्रा को सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए इस बार जनभागीदारी पर विशेष फोकस किया गया है। QR कोड आधारित फीडबैक सिस्टम, क्विक रिस्पॉन्स टीम और आधुनिक तकनीक के जरिए यात्रा को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जा रहा है।
केदारनाथ में 24 घंटे मिलेगा गर्म पानी
इस बार केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं को 24 घंटे मुफ्त गर्म पानी उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की जा रही है। यह व्यवस्था पिरूल और खच्चरों की लीद से बने बायोमास पैलेट्स से चलने वाले गीजर के माध्यम से होगी, जो एक अभिनव और पर्यावरण अनुकूल पहल है।
सरकार का लक्ष्य है कि चारधाम यात्रा 2026 को स्वच्छ, सुरक्षित, तकनीक आधारित और पूर्णतः प्लास्टिक मुक्त बनाया जाए, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके और पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित हो।







