June 17, 2024 6:36 AM

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प्रत्येक धार्मिक स्थल की अपनी परंपरा और मर्यादा होती है, उसी के अनुरूप वहां मर्यादित वस्त्र पहनकर आना चाहिए – अध्यक्ष BKTC

देहरादून: श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने कहा कि प्रत्येक धार्मिक स्थल की अपनी परंपरा और मर्यादा होती है। उसी के अनुरूप वहां मर्यादित आचरण करना चाहिए और मर्यादित वस्त्र पहनकर आना चाहिए।अजेंद्र अजय ने यह बात महानिर्वाणी अखाड़े के एक बयान से जुड़े प्रश्न पर कही।

मीडियाकर्मियों ने उनसे पूछा था कि महानिर्वाणी अखाड़े ने यह कहा है कि यदि स्त्री-पुरुष मंदिरों में आ रहे हैं तो उनका 80 प्रतिशत शरीर ढका होना चाहिए। सभी को मर्यादा का ख्याल रखना चाहिए। अजेंद्र ने इस प्रश्न के उत्तर में कहा कि प्रत्येक धार्मिक स्थल की अपनी मान्यताएं और मर्यादाएं होती हैं।

उसी माहौल के अनुरूप आचरण और वेशभूषा होनी चाहिए। पर्यटन और धार्मिक यात्रा के फर्क को समझना होगा। स्वाभाविक रूप से यदि आप धार्मिक स्थल की यात्रा पर जा रहे हैं तो आपकी वेशभूषा मर्यादित होनी चाहिए। यह उन धार्मिक स्थलों के लाखों-करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ा विषय है, जहां आप यात्रा पर जा रहे हैं। धार्मिक स्थलों की मान्यता से छेड़छाड़ करने का किसी को भी अधिकार नहीं है। मर्यादित आचरण, व्यवहार और वस्त्र पहनकर ही वहां जाना चाहिए।

हरिद्वार मे भी मंदिर में छोटे कपड़े पहनकर आने पर पाबंदी

हरिद्वार के दक्ष प्रजापति मंदिर में छोटे कपड़े पहनकर आने वाली महिलाओं और युवतियों को दर्शनों से रोका जा सकता है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष एवं पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने श्रद्धालुओं के लिए इस संबंध में एक वीडियो जारी किया है। श्रीमहंत ने अपील करते हुए कहा कि मंदिर में 80 फीसदी शरीर ढके कपड़े पहनकर ही महिलाएं और युवतियां दर्शन के लिए आएं।

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने कहा कि आजकल समाज में जो प्रचलन चल रहा है कि उस पर सचेत रहने की आवश्यकता है। जो माताएं, बहनें और कन्याएं मंदिर आती हैं उनके वस्त्रों का पहनावा ठीक होना चाहिए। कई बार मंदिर में छोटे कपड़े पहनकर आने वाली महिलाओं और कन्याओं को देखकर लोग असहज महसूस करते हैं जिससे समाज में अच्छा संदेश नहीं जाता है। उन्होंने कहा कि कांवड़ मेले में मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ रहेगी।

महंत ने कहा कि युवा अवस्था के बच्चे हर तरह की बुराई के तरफ आकर्षित होते हैं। इस पर अंकुश लगना आवश्यक है। बच्चों के परिवार के लोग उनको समझाएं। श्रीमहंत ने कहा कि पहले भी कई बार शरीर ढके कपड़े पहनकर मंदिर आने की अपील कर चुके हैं लेकिन अब कांवड़ मेले को देखते हुए फिर से अपील जारी कर रहे हैं। मंदिर में 80 फीसदी शरीर ढके कपड़े पहनकर आने वालों को ही दर्शन करने दिए जाएंगे।