नई दिल्ली: कोविड 19 महामारी और लॉकडाउन के बाद अब महंगाई ने आम आदमी का जीना दूभर कर दिया है. हालात ये है कि इस वक्त देश में ‘दिन दोगुनी और चौगुनी’ की दर से महंगाई बढ़ती जा रही है. महंगाई की वजह से गरीबों और मध्यम वर्ग का जीना हराम होता जा रहा है. देश में इस वक्त खुदरा महंगाई दर 8 साल के उच्च स्तर पर है. वहीं, रिजर्व बैंक की नीतियों को प्रभावित करने वाला थोक महंगाई दर ने भी नया रिकॉर्ड कायम कर दिया है. देश में थोक महंगाई दर छलांग लगाकर 15 फीसदी के पार निकल गई है. गौरतलब है कि वर्ष 1998 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है, जब थोक महंगाई की दर 15 फीसदी के पार निकली है. इससे पहले साल 1998 के दिसंबर महीने में थोक महंगाई 15 फीसदी से ऊपर रही थी.

हालात ये है कि गरीबों की थाली की रौनक कही जाने वाली दाल-चावल हो या सब्जियां सभी के दाम आसमान छू रहे हैं. इसके साथ ही सरसों तेल, रिफाइंड तेल के दामों में बढ़ोतरी ने रसोई घर की सूरत ही बदल दी है. खाद्य तेलों के दामों में वृद्धि होने से गृहिणियों को बेशुमार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. बढ़ती महंगाई से मध्यम वर्गीय परिवारों का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है.
हर चीज के बढ़े दाम
महंगाई की मार सिर्फ तेल और सब्जियों पर ही नहीं पड़ रही है. चावल-दाल और नमक की कीमत भी काफी बढ़ गई है. 10 वर्ष पहले के मुकाबले चावल की कीमत 42 फीसदी तक बढ़ गई है. 9 मई 2013 को एक किलो चावल की औसत कीमत 25.40 रुपये थी, जो मई 2022 में बढ़कर 36.07 रुपये हो गई है. इसी तरह तुअर दाल की कीमत में 48 फीसदी का उछाल देखा जा रहा है. 10 वर्ष पहले एक किलो तुअर दाल की कीमत 70 रुपये थी, जो अब बढ़कर 102 रुपये के पार पहुंच गई है. इसके अलावा तेल की कीमतें भी जमकर बढ़ी हैं. 10 वर्ष पहले के मुकाबले मूंगफली तेल में 100 प्रतिशत तक का उछाल है. सरसों के तेल की कीमत 84% तक बढ़ी है. सबसे ज्यादा तो पाम ऑयल महंगा हुआ है. इसकी कीमत 10 साल में 140% बढ़ गई है. जबकि, वनस्पति तेल 10 साल में 129% महंगा हो गया है.







