नई दिल्ली : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश कर दिया है. नए बजट में सरकार ने एक ओर जहां कुछ जरूरी वस्तुओं और सेवाओं को सस्ता कर आम जनता को राहत देने की कोशिश की है, वहीं दूसरी ओर कुछ क्षेत्रों में कर बढ़ाकर राजस्व जुटाने पर भी जोर दिया है. खासतौर पर स्वास्थ्य, हरित ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के संकेत इस बजट में साफ नजर आते हैं.
बायो-फार्मा सेक्टर पर खास फोकस
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में बताया कि देश में बायो-फार्मा सेक्टर को मजबूती देने के लिए एक नई योजना शुरू की जाएगी. इसके तहत 1,000 मान्यता प्राप्त परीक्षण स्थलों (टेस्टिंग साइट्स) का एक राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार किया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे दवाओं के परीक्षण और उत्पादन में तेजी आएगी, लागत घटेगी और भारत को वैश्विक फार्मा हब बनाने में मदद मिलेगी. इसी पहल का असर दवाओं की कीमतों पर भी देखने को मिला है.
नए बजट में जहां कुछ चीजों पर आम आदमी को बड़ी राहत मिली है, वहीं कुछ चीजें महंगी भी हो गईं हैं. तो आइये जानें क्या सस्ता और क्या महंगा हुआ है?
क्या-क्या हुआ सस्ता
शुगर और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं सस्ती हुई हैं.
खेल-कूद के सामान पर कर में राहत दी गई है, जिससे ये सस्ते होंगे.
बायोगैस, सीएनजी को बढ़ावा देने के लिए इसकी कीमत घटाई गई है.
माइक्रोवेव, सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक सामान सस्ते होंगे.
जूते और लेदर से बने उत्पादों की कीमतों में भी कमी आएगी.
मोबाइल फोन और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बैटरी सस्ती होने से टेक्नोलॉजी और ई-मोबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा.
विदेश यात्रा भी पहले की तुलना में सस्ती होगी.
क्या हुआ महंगा
स्टॉक ऑप्शंस और फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर Securities Transaction Tax (STT) को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है.
अगर कोई व्यक्ति इनकम टैक्स में गलत जानकारी देता है, तो उस पर 100% तक पेनल्टी लग सकती है.
शराब पर कर बढ़ने से इसकी कीमतें बढ़ेंगी.
स्क्रैप और खनिज पर शुल्क बढ़ाया गया है, जिससे उद्योगों की लागत बढ़ सकती है.
फ्यूचर और ऑप्शन ट्रेडिंग पर कर भार बढ़ने से शेयर बाजार में सक्रिय निवेशकों को झटका लग सकता है.
चल संपत्तियों (Movable Assets) की जानकारी नहीं देने पर भी अब पेनल्टी लगेगी.
महंगी घड़ियां जैसे लग्जरी प्रोडक्ट्स पर टैक्स बढ़ाया गया है.
कुल मिलाकर केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने संतुलन बनाने की कोशिश की है. जहां स्वास्थ्य, हरित ऊर्जा और आम उपभोक्ता को राहत दी गई है, वहीं कुछ क्षेत्रों से अतिरिक्त राजस्व जुटाने के कदम भी उठाए गए हैं.







