देहरादून: यशपाल आर्य, नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बजट 2026 भारत की कई आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों का एक भी समाधान नहीं देता है। उन्होंने कहा कि “मिशन मोड” अब “चैंलेंज रूट” बन गया है। “रिफॉर्म एक्सप्रेस” शायद ही किसी “रिफॉर्म” जंक्शन पर रुकती है। नतीजा कोई पॉलिसी विजन नहीं, कोई राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं। आर्य ने कहा कि हमारे अन्नदाता किसान अभी भी सार्थक कल्याणकारी सहायता या इनकम सिक्योरिटी प्लान का इंतजार कर रहे हैं। असमानता ब्रिटिश राज के समय के स्तर से भी आगे निकल गई है, लेकिन बजट में इसका जिक्र तक नहीं है और न ही SC,ST, OBC, EWS और अल्पसंख्यक समुदायों को कोई सहायता दी गई है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वित्त आयोग की सिफारिशों का और अध्ययन करना होगा, लेकिन ऐसा नहीं लगता कि वे उन राज्य सरकारों को कोई राहत देंगी जो गंभीर वित्तीय संकट में हैं। संघवाद इसका शिकार हो गया है।
उन्होंने कहा कि क्या गायब है और कहाँ इसकी जरूरत हैः-
- मैन्युफैक्चरिंग- कोई रिवाइवल रणनीति नहीं 13 प्रतिशत पर अटकी हुई है। “मेक इन इंडिया” कहाँ है?
- नौकरियाँः- हमारे युवाओं के लिए रोजगार या वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कोई गंभीर योजना नहीं। पिछली इंटर्नशिप और स्किल डेवलपमेंट योजनाओं का क्या नतीजा निकला?
- एक्सपोर्ट/ट्रेड- एक्सपोर्ट में गिरावट, टैरिफ जोखिम, व्यापार घाटा, घटते वैश्विक हिस्से पर कोई जवाब नहीं। गिरते रुपये के लिए कोई प्लान है?
- गरीब और मध्यम वर्ग- महंगाई से कोई राहत नहीं, बचत घट रही है, कर्ज बढ़ रहा है, वेतन स्थिर है। कंज्यूमर डिमांड को फिर से शुरू करने का कोई आइडिया क्यों नहीं है?
- प्राइवेट इन्वेस्टमेंट- भरोसे का कोई संकेत नहीं – FDI और वेतन में ठहराव को नजरअंदाज किया गया। सिर्फ छोटे-मोटे बदलाव क्यों, कोई स्ट्रक्चरल रिफॉर्म क्यों नहीं?
- इंफ्रास्ट्रक्चर- वादे दोहराए गए, डिलीवरी गायब – शहर अभी भी रहने लायक नहीं हैं। हमें “स्मार्ट सिटी” या रहने लायक शहर कब मिलेंगे?
- सोशल सिक्योरिटी- सोशल सिक्योरिटी और कल्याण पर एक भी महत्वपूर्ण घोषणा नहीं हुई। MGNREGA की जगह लेने वाले नए कानून के लिए आवंटन पर एक शब्द भी नहीं है। क्यों?
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह बजट कोई समाधान नहीं देता, यहाँ तक कि पॉलिसी की कमी को छिपाने के लिए नारे भी नहीं!







