January 28, 2026 12:48 AM

UCC दिवस: उत्तराखंड यूनिफॉर्म सिविल कोड को एक साल, सीएम बोले- मुस्लिम महिलाओं को कुरीतियों से छुटकारा मिला

देहरादून: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू हुए एक साल का वक्त पूरा हो गया है. 27 जनवरी 2025 को उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू हुआ था. यूसीसी लागू होने के दौरान ही उत्तराखंड सरकार ने हर साल 27 जनवरी को यूसीसी दिवस मनाने का निर्णय लिया था. जिसके तहत प्रदेश भर में यूसीसी दिवस को लेकर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यूसीसी के इस जर्नी के अनुभवों को साझा किया. साथ ही समान नागरिक संहिता को तैयार करने वाले कमेटी के सदस्यों, कुशल क्रियान्वयन करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों और पंजीकरण में योगदान देने वाले वीएलसी को भी सम्मानित किया.

यूसीसी लागू होने के बाद इन एक सालों के भीतर यूसीसी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के लिए 5 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं. जिसमें से 4.8 लाख आवेदक को स्वीकृत किया गया. इसमें विवाह रजिस्ट्रेशन के लिए 4.2 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए. जिसमें से चार लाख आवेदन को स्वीकृति मिली.

इसी तरह रजिस्टर्ड विवाह की स्वीकृति के लिए 86 हज़ार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए. जिसमें से 83 हज़ार से अधिक आवेदन स्वीकृत किए गए. वसीयत का पंजीकरण के लिए 5 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए. जिसमें से 4 हज़ार से अधिक आवेदनों को मंजूरी मिली है.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा आज का दिन उत्तराखंड राज्य के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित रहेगा, इसी दिन राज्य में समान नागरिक संहिता लागू हुई है. उन्होंने कहा सनातन संस्कृति और परंपरा सदैव समरसता और समानता की संवाहक रही है. सीएम ने कहा बाबा साहब भीमराव अंबेडकर सहित सभी संविधान निर्माताओं ने समान नागरिक संहिता को संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों में सम्मिलित किया था. उनका मत था कि देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना चाहिए. जिसे उत्तराखंड में लागू किया गया है.

सीएम धामी ने कहा समाज में कुछ समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के कारण भेदभाव, असमानता और अन्याय की स्थिति बनी हुई थी. यूसीसी लागू होने से न केवल राज्य से सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हुए हैं. प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के एक नए युग की शुरुआत भी हुई है. अब उत्तराखंड की मुस्लिम बहन-बेटियों को हलाला, इद्दत, बहुविवाह, बाल विवाह और तीन तलाक जैसी कुरीतियों से मुक्ति मिली है.

यूसीसी लागू होने के बाद उत्तराखंड में एक भी हलाला या बहुविवाह का मामला सामने नहीं आया. यही कारण है कि मुस्लिम महिलाओं ने इस कानून का स्वागत किया है.

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