March 30, 2026 7:37 PM

उत्तराखंड में बनेंगे दो आधुनिक साहित्य ग्राम, युवा लेखकों को मिलेगा मंच : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

देहरादून। उत्तराखंड भाषा संस्थान की ओर से मुख्य सेवक सदन में आयोजित उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान समारोह-२०२५ में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के साहित्यकारों को सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए राज्य में दो आधुनिक साहित्य ग्राम स्थापित किए जाएंगे, जहां साहित्यकारों और युवा लेखकों को रचनात्मक कार्य के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान उत्तराखंड साहित्य भूषण सम्मान से डॉ. जितेन ठाकुर को सम्मानित किया। इसके साथ ही डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, श्याम सिंह कुटौला, डॉ. प्रीतम सिंह, केसर सिंह राय और अताए साबिर अफजल मंगलौरी को उत्तराखंड दीर्घकालीन उत्कृष्ट साहित्य सृजन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट साहित्यकारों और युवा कलमकार प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। साहित्य नारी वंदन सम्मान के तहत प्रोफेसर दिवा भट्ट, उत्कृष्ट बाल साहित्य के लिए प्रोफेसर दिनेश चमोला तथा उत्तराखंड मौलिक रचना पुरस्कार के अंतर्गत डॉ. भूपेंद्र बिष्ट, डॉ. सुधा जुगरान और शीशपाल गुसाईं को सम्मानित किया गया। वहीं उत्कृष्ट कुमाऊनी और गढ़वाली साहित्य के लिए तारा पाठक, हेमंत सिंह बिष्ट और गजेंद्र नौटियाल को भी सम्मान प्रदान किया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश के महान साहित्यकारों को सम्मानित करना उनके लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि डॉ. जितेन ठाकुर न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे हिंदी साहित्य जगत के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पावन भूमि सदियों से ज्ञान, संस्कृति और सृजन की भूमि रही है। यहां के हिमालय, गंगा और प्राकृतिक सौंदर्य ने अनेक लेखकों और कवियों को प्रेरित किया है। सुमित्रानंदन पंत, गौरा पंत ‘शिवानी’, मोहन उप्रेती और शैलेश मटियानी जैसे साहित्यकारों ने इस भूमि को गौरवान्वित किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और लेखक समाज के मार्गदर्शक होते हैं। स्वतंत्रता आंदोलन और उत्तराखंड राज्य निर्माण में भी साहित्यकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार साहित्य और संस्कृति के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। साहित्यकारों को विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित करने के साथ-साथ ग्रंथ प्रकाशन के लिए भी अनुदान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के साहित्यकारों से आह्वान किया कि वे अपनी रचनाओं के माध्यम से उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को देश और विदेश तक पहुंचाएं तथा समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य करते रहें।

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