SC ने गुजरात हिंसा से जुड़ी सभी कार्यवाही बंद की, कहा- लंबा वक्त बीत गया, अब सुनवाई करना व्यर्थ, 2014 मे PM को दी थी क्लीन चिट, पढ़ें पूरी खबर

नई दिल्ली: भारत की सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को 2002 के चर्चित गुजरात दंगों से संबंधित सभी कार्यवाही बंद कर दी। सुप्रीम कोर्ट के सामने गुजरात दंगों से जुड़ी कई याचिकाएं लंबित थी। कोर्ट ने मामले को लेकर कहा कि समय बीतने के साथ सभी मामले व्यर्थ हो चुके हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि कोर्ट के आदेश के तहत विशेष जांच दल द्वारा चलाए गए नौ प्रमुख मामलों में से आठ में ट्रायल खत्म हो गया है। गुजरात के नरोदा गांव के ट्रायल कोर्ट में एक मामले में अंतिम बहस चल रही है।

गुजरात दंगे का इतिहास

बता दें कि 27 फरवरी साल 2002 में गुजरात के गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन को आग के हवाले कर दिया गया था, जिसमें अयोध्या से लौट रहे 58 हिंदू तीर्थ यात्रियों और कारसेवकों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद पूरे गुजरात में सांप्रदायिक दंगे शुरू हुए थे। गुजरात के अलग अलग गांव कस्बों में तीन महीनों तक दो समुदायों के बीच हिंसा की आग भड़कती रही।

पीएम नरेंद्र मोदी को क्लीन चीट

अगले एक साल तक जगह जगह गुजरात में मुस्लिम आबादी के खिलाफ ऐसी कई घटनाएं हुईं जहां चुन चुनकर उनका नरसंहार किया गया। मुस्लिम परिवार के घरों को आग के हवाले कर दिया गया। गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर तब हिंसा को भड़काने का आरोप लगा। हालांकि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने साल 2014 के आम चुनावों से पहले नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दे दी थी। अप्रैल 2014 में शीर्ष अदालत ने हिंसा से संबंधित नौ मामलों में एसआईटी की जांच पर संतोष व्यक्त किया और एसआईटी की रिपोर्ट को “निराधार” बताते हुए एक याचिका को खारिज कर दिया।

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