देहरादून। शहर में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। विभाग की कथित लापरवाही के कारण एक उपभोक्ता को सामान्य खपत के बावजूद 81,603 रुपये का भारी-भरकम बिजली बिल थमा दिया गया, जिससे उपभोक्ता के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
जीएमएस रोड निवासी वीणुगुन पाण्डेय के अनुसार उनके घर की औसत मासिक बिजली खपत 150 से 200 यूनिट के बीच रहती है, इसके बावजूद विभाग की ओर से 20 अगस्त 2025 से 31 दिसंबर 2025 की अवधि का 81,603 रुपये का बिल भेज दिया गया। उपभोक्ता का कहना है कि शिकायत करने पर बिल में संशोधन तो किया गया, लेकिन इसे घटाकर 58,440 रुपये कर दिया गया और बाद में 51,143 रुपये जमा करने का दबाव बनाया गया, जबकि वह नियमित रूप से हर माह बिल का भुगतान करते रहे हैं।
उपभोक्ता का आरोप है कि विभाग ने दो वर्षों से मीटर खराब होने की बात कहकर 450 से 600 यूनिट तक की खपत दर्शाई, जबकि वास्तविक खपत इससे काफी कम है। अब उसी मीटर को सही बताते हुए भारी बिल जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि यदि मीटर दो वर्षों से खराब था तो उसे बदलने की जिम्मेदारी किसकी थी। साथ ही, कम खपत होने के बावजूद अधिक यूनिट का बिल किस आधार पर जारी किया गया। उपभोक्ता का कहना है कि बार-बार अनुरोध के बावजूद विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
मध्यमवर्गीय परिवार के लिए एकमुश्त इतनी बड़ी राशि का बिल आना बड़ी परेशानी का कारण बन गया है। ऐसे में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और बिलिंग व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।








