February 23, 2026 4:29 AM

CM धामी ने संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम में वितरित की छात्रवृत्तियां, ई-संस्कृत संभाषण शिविर का किया शुभारंभ

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने गार्गी बालिका संस्कृत छात्रवृत्ति एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर अनुसूचित जाति/जनजाति संस्कृत छात्रवृत्ति विद्यार्थियों को प्रदान की।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षा स्वाध्याय केन्द्र एवं ई-संस्कृत संभाषण शिविर का वर्चुअल शुभारंभ किया तथा उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के त्रैमासिक पत्र संस्कृत वार्ता का विमोचन भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड की पहचान केवल पर्वतों और ऐतिहासिक मंदिरों से ही नहीं, बल्कि देववाणी संस्कृत से भी है। उन्होंने कहा कि वेदों से लेकर उपनिषदों, रामायण और महाभारत तक भारतीय ज्ञान परंपरा की जड़ें संस्कृत में निहित हैं। संस्कृत हमारे अतीत की धरोहर ही नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं की भाषा भी है।

उन्होंने संस्कृत के वैज्ञानिक व्याकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि पाणिनि की अष्टाध्यायी आज भी विश्वभर के भाषाविदों के लिए शोध का विषय बनी हुई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से संस्कृत को आधुनिक और व्यवहारिक भाषा के रूप में स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। संस्कृत साहित्य को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने तथा एआई तकनीक के माध्यम से संस्कृत ग्रंथों को नए रूप में प्रस्तुत करने की दिशा में भी कार्य हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। सभी जनपदों में आदर्श संस्कृत ग्राम स्थापित किए गए हैं तथा प्रदेश में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। ‘गार्गी संस्कृत बालिका छात्रवृत्ति योजना’ की शुरुआत भी राज्य में की गई है।

संस्कृत शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य में संस्कृत शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए कई नवाचार किए गए हैं। विश्वविद्यालयों में सुविधाओं का विस्तार किया गया है तथा प्रत्येक जनपद में एक-एक संस्कृत ग्राम विकसित किया गया है।

इस अवसर पर विधायक सविता कपूर, खजान दास, सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक कुमार, कुलपति प्रो. रमाकांत पाण्डेय और निदेशक संस्कृत शिक्षा कंचन देवराड़ी सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।

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