March 11, 2026 8:14 PM

उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकगायक दीवान कनवाल का निधन, सीएम धामी और राज्यपाल ने जताया शोक

देहरादून: उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक गायक दीवान कनवाल का बुधवार सुबह निधन हो गया। उन्होंने अल्मोड़ा जिले के खत्याड़ी स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से प्रदेश के लोक कलाकारों और संगीत प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई है। उनका अंतिम संस्कार अल्मोड़ा के बेतालेश्वर घाट पर किया जाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोकगायक दीवान कनवाल के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दीवान कनवाल ने उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और लोक संगीत को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि उनका निधन राज्य की लोक कला और सांस्कृतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।

मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिजनों और उनके प्रशंसकों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।

वहीं राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने भी प्रसिद्ध लोक कलाकार दीवान कनवाल के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। राज्यपाल ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं।

अल्मोड़ा के पूर्व विधायक रघुनाथ सिंह चौहान ने भी लोकगायक दीवान कनवाल को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके सांस्कृतिक योगदान को याद किया।

दीवान कनवाल का लोकप्रिय कुमाऊंनी गीत द्वी दिना का ड्यार शेरुवा यो दुनी में लोगों के बीच काफी प्रसिद्ध रहा है। बताया जा रहा है कि वह पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे और हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल में उनका उपचार भी हुआ था। बाद में वह खत्याड़ी स्थित अपने घर पर स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे, लेकिन बुधवार सुबह करीब चार बजे उनका निधन हो गया। उनकी उम्र लगभग 65 वर्ष थी।

परिवार में उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं। उनकी पत्नी का पहले ही निधन हो चुका था। वर्तमान में उनके साथ उनकी वृद्ध माता और बड़ा बेटा रहते थे। जिला सहकारी बैंक से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह लोक संगीत और लोकगीतों के सृजन में समर्पित कर दिया था।

पिछले वर्ष उन्होंने “शेर दा अनपढ़” की यादों को ताजा करता एक गीत भी रचा था, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। उनके गीतों में जीवन की क्षणभंगुरता और लोक जीवन की संवेदनाएं गहराई से झलकती थीं। उनके प्रसिद्ध गीत दो दिनों का ड्यार शेरुवा यो दुनी में, ना त्यार ना म्यार शेरूवा यो दुनि में आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं।

लोक समुदाय का कहना है कि दीवान कनवाल की रचनाएं कुमाऊंनी संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं और उनके गीत आने वाली पीढ़ियों को भी लोक संस्कृति से जोड़ते रहेंगे।

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