देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में चल रहे सत्र के दौरान भारतीय जनता पार्टी के विधायक शिव अरोड़ा ने नियम 300 के तहत प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने का प्रस्ताव रखा।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार पहले ही प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू कर चुकी है और इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज से जुड़े कई विषय ऐसे होते हैं जिनसे लोगों की भावनाएं जुड़ी होती हैं और सरकार सभी वर्गों की भावनाओं व सुझावों का सम्मान करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर भी समाज के अलग-अलग वर्गों की अपनी राय है। सरकार इस विषय पर आने वाले सुझावों और परिस्थितियों का अध्ययन करेगी और यदि भविष्य में आवश्यकता महसूस होती है तो इस दिशा में कदम उठाने पर विचार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश में संतुलित विकास सुनिश्चित करना है। इसके लिए सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए जाते हैं। जनसंख्या से जुड़े विषयों को भी इसी व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाएगा, ताकि समाज के सभी वर्गों के हित सुरक्षित रह सकें।
वहीं विधानसभा सत्र के पांचवें दिन गैस की उपलब्धता को लेकर कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा की सीढ़ियों पर प्रदर्शन किया। कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश में गैस सिलेंडर की किल्लत है और सरकार इस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। साथ ही गैस की कालाबाजारी पर भी रोक नहीं लग पा रही है।
इस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में गैस की किसी प्रकार की कमी नहीं है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि गैस की आपूर्ति सुचारू रखी जाए और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। यदि कहीं कोई समस्या सामने आती है तो प्रशासन को इसकी जानकारी दें, ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुचारू बनी रहे और आम जनता को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।







