October 29, 2026 8:14 PM

दो आईपीएस अधिकारियों के बकाया वेतन पर विचार करे सरकार, हाईकोर्ट के निर्देश…

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी नीरू गर्ग और अरुण मोहन जोशी के बकाया वेतन के मामले में सक्षम प्राधिकारी को वेतन जारी करने पर विचार करने के निर्देश दिए हैं। दोनों अधिकारियों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति और कार्यमुक्ति से जुड़े विवाद पर बुधवार, 28 अक्टूबर को देर रात तक सुनवाई हुई। मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर 2026 को होगी।

मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने की।

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद

मामले के अनुसार, उत्तराखंड सरकार ने 16 फरवरी 2026 को दोनों अधिकारियों के नाम केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए भेजे थे। इसके बाद पांच मार्च को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2005 बैच की आईपीएस अधिकारी नीरू गर्ग को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी अरुण मोहन जोशी को सीमा सुरक्षा बल में उपमहानिरीक्षक के पद पर नियुक्त किया। छह मार्च को राज्य सरकार ने दोनों अधिकारियों को कार्यमुक्त कर दिया।

अधिकरण ने रद्द किए थे प्रतिनियुक्ति के आदेश

दोनों अधिकारियों ने नई दिल्ली स्थित केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण की प्रधान पीठ में नियुक्ति और कार्यमुक्ति के आदेशों को चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि उन पर पांच साल की प्रतिनियुक्ति संबंधी रोक लागू थी और उनकी सहमति के बिना उनके नाम केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए भेजे गए।

उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि उत्तराखंड पुलिस में पुलिस महानिरीक्षक के पद पर तैनात होने के बावजूद उन्हें उपमहानिरीक्षक के पदों पर नियुक्त किया गया।

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने 10 सितंबर 2026 को दोनों अधिकारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए प्रतिनियुक्ति और कार्यमुक्ति के आदेश रद्द कर दिए थे। अधिकरण ने उन्हें उत्तराखंड संवर्ग में उनके संबंधित पदों पर बहाल करने और सेवा से जुड़े सभी देय लाभ देने के निर्देश भी दिए थे।

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में दी चुनौती

उत्तराखंड सरकार ने अधिकरण के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान दोनों अधिकारियों की ओर से हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया गया। उनका कहना था कि चूंकि चुनौती दिए गए फैसले को नई दिल्ली स्थित अधिकरण की प्रधान पीठ ने सुनाया था, इसलिए उसे दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी जानी चाहिए।

इसी विवाद के बीच दोनों अधिकारियों को वेतन नहीं मिलने का मुद्दा भी अदालत के सामने उठाया गया। इस पर हाईकोर्ट ने सक्षम प्राधिकारी को उनके बकाया वेतन जारी करने के संबंध में विचार करने का निर्देश दिया। अब मामले में अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।

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