September 13, 2026 1:56 PM

यूआईआईडीबी को 7 हजार बीघा जमीन देने की बात गलत, अब तक मिली सिर्फ 45 एकड़ जमीन – आर. मीनाक्षी सुंदरम

देहरादून। उत्तराखंड इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट डेवलपमेंट बोर्ड को 7 हजार बीघा जमीन आवंटित किए जाने की चर्चाओं पर राज्य सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। प्रमुख सचिव नियोजन एवं यूआईआईडीबी के प्रबंध निदेशक आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि बोर्ड को 7 हजार बीघा जमीन दिए जाने की बात तथ्यात्मक रूप से गलत है। अब तक चिन्हित जमीन में से केवल 45 एकड़ ही यूआईआईडीबी को उपलब्ध हुई है और इतनी बड़ी मात्रा में जमीन हासिल करने की कोई प्रक्रिया भी नहीं चल रही है।

उन्होंने बताया कि यूआईआईडीबी का गठन राज्य में पूंजी निवेश बढ़ाने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने और सरकारी भूमि व संसाधनों के सुनियोजित उपयोग के उद्देश्य से किया गया है। औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्र में निवेश के लिए सिडकुल पहले से काम कर रहा है, जबकि यूआईआईडीबी के माध्यम से पर्यटन, आतिथ्य, वेलनेस, शिक्षा, स्वास्थ्य, सूचना प्रौद्योगिकी और अन्य सेवा क्षेत्रों में बड़े निवेश को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।

सुंदरम के अनुसार, उत्तराखंड में पर्यटन और वेलनेस क्षेत्र में निवेश की काफी संभावनाएं हैं। उच्च गुणवत्ता वाले होटल, रिसॉर्ट और वेलनेस केंद्रों के विकास के साथ राज्य को प्रमुख पर्यटन और विवाह आयोजन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे पर्यटन के साथ स्थानीय कारोबार, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

शिक्षा और स्वास्थ्य में भी निवेश पर जोर

यूआईआईडीबी के माध्यम से शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी गुणवत्तापूर्ण निवेश को प्रोत्साहित करने की योजना है। सरकार का कहना है कि इससे राज्य में उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के साथ युवाओं को स्थानीय स्तर पर बेहतर अवसर मिलेंगे। निवेश से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की उम्मीद है।

सरकारी जमीन का नहीं होगा स्थायी हस्तांतरण

प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि यूआईआईडीबी के माध्यम से निवेश को बढ़ावा देने का अर्थ सरकारी जमीन की बिक्री नहीं है। जमीन का स्वामित्व राज्य सरकार के पास ही रहेगा और निवेश परियोजनाओं के लिए इसका उपयोग निर्धारित नियमों के तहत पट्टे पर किया जाएगा। साथ ही पर्यावरणीय और अन्य वैधानिक मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। प्रेस नोट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पट्टे की अवधि 60 वर्ष है, 90 वर्ष नहीं।

उन्होंने कहा कि यूआईआईडीबी का उद्देश्य अनुपयोगी सरकारी जमीन का अनियोजित हस्तांतरण करना नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों का नियोजित उपयोग कर सेवा क्षेत्र में निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।

लैंड बैंक तैयार करने की तैयारी

सुंदरम ने कहा कि पर्वतीय राज्य होने के कारण उत्तराखंड में निवेश परियोजनाओं के लिए उपयुक्त जमीन उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण है। इसी वजह से सेवा क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए सरकारी जमीन का व्यवस्थित लैंड बैंक तैयार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि चिन्हित जमीन का उपयोग निर्धारित नियमों, कानूनों और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप ही किया जाएगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यूआईआईडीबी और ऑप्टिमल लैंड यूटिलाइजेशन कमेटी अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं। भूमि हस्तांतरण से जुड़ी प्रक्रियागत कठिनाइयों को दूर करने के लिए संबंधित समिति का गठन वर्ष 2022 में किया गया था, जबकि यूआईआईडीबी का उद्देश्य सेवा क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना है।

सरकार के अनुसार, यूआईआईडीबी के माध्यम से पर्यटन, आतिथ्य, वेलनेस, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सेवा क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से स्थानीय रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे। सरकार ने दोहराया कि बोर्ड को 7 हजार बीघा जमीन दिए जाने की बात सही नहीं है और वर्तमान में उसके पास केवल 45 एकड़ जमीन उपलब्ध है।

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