August 22, 2026 9:32 PM

औद्योगिक विकास और निवेश को नई गति दे रहा उत्तराखंड : CM धामी

नई दिल्ली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में आयोजित बीटीइंडिया@100 कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने ‘उत्तराखंड : भारत की औद्योगिक विकास यात्रा को गति देने वाला राज्य’ विषय पर अपने विचार साझा करते हुए प्रदेश की औद्योगिक क्षमता, निवेश की संभावनाओं, बेहतर कनेक्टिविटी, युवाओं के लिए रोजगार और राज्य के विकास मॉडल की जानकारी देश के प्रमुख उद्योगपतियों के सामने रखी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 में आयोजित वैश्विक निवेशक सम्मेलन के बाद उत्तराखंड की औद्योगिक पहचान में बड़ा बदलाव आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में आयोजित सम्मेलन में 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। सरकार ने निवेश प्रस्तावों को केवल समझौता ज्ञापन तक सीमित रखने के बजाय उन्हें धरातल पर उतारने के लिए नीतिगत और प्रशासनिक स्तर पर पहले से तैयारियां कीं। निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने के उद्देश्य से राज्य में 30 से अधिक नई नीतियां लागू की गई हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां दूसरे राज्यों से अलग हैं और राज्य में बड़े औद्योगिक भूमि बैंक सीमित हैं। हालांकि हरिद्वार, देहरादून और ऊधमसिंह नगर में उद्योगों की जरूरत के अनुरूप भूमि उपलब्ध है। सरकार निवेशकों को भूमि के साथ आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने बेहतर कनेक्टिविटी को राज्य की बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे के शुरू होने से दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय कम हुआ है। देहरादून से देश के प्रमुख शहरों के लिए 50 से अधिक हवाई सेवाएं उपलब्ध हैं। पंतनगर भी कृषि के साथ औद्योगिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। प्रस्तावित ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे को औद्योगिक और माल परिवहन विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास को केवल मैदानी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखा जा रहा है। पौड़ी, अल्मोड़ा और चमोली में औद्योगिक पार्क विकसित करने की दिशा में काम चल रहा है। एक जिला-दो उत्पाद जैसी योजनाओं के माध्यम से स्थानीय उत्पादों, छोटे उद्यमियों और पारंपरिक आर्थिक गतिविधियों को बाजार से जोड़ा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड ने निवेश के अनुकूल वातावरण बनाने में उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य ने नीति आयोग की सतत विकास लक्ष्य रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया है। उन्होंने युवाओं के लिए रोजगार और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को सरकार की प्राथमिकता बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्तियां दी गई हैं। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नकल और पेपर लीक के मामलों में कड़ी कार्रवाई की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में स्टार्टअप और स्वरोजगार का दायरा भी तेजी से बढ़ा है। उनके अनुसार मुख्यमंत्री बनने के समय राज्य में करीब 700 स्टार्टअप थे, जिनकी संख्या अब लगभग दो हजार हो गई है। होमस्टे, छोटे होटल, कृषि, बागवानी और स्थानीय उद्यमों के माध्यम से युवा और महिलाएं स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री उद्यमशाला के माध्यम से युवाओं और महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने, प्रशिक्षण, बाजार और ऋण प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है। अब तक 13 हजार से अधिक लोग इसके तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।

पलायन की चुनौती का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी’ को राज्य के विकास में उपयोग करना सरकार की प्राथमिकता है। पर्यटन, स्वरोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से रिवर्स पलायन को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने राज्य में रिवर्स माइग्रेशन में 44 प्रतिशत वृद्धि का भी उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री ने पर्यटन को राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा और आदि कैलाश में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंच रहे हैं। इससे सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिला है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सुरक्षित, शांतिपूर्ण और निवेश की अपार संभावनाओं वाला राज्य है। प्राकृतिक संपदा, बेहतर कानून-व्यवस्था, कुशल मानव संसाधन, पर्यटन क्षमता और मजबूत होती कनेक्टिविटी राज्य को दीर्घकालिक निवेश के लिए आकर्षक बनाती है। मुख्यमंत्री ने मारुति और हुंडई समेत प्रमुख वाहन कंपनियों के शीर्ष नेतृत्व को उत्तराखंड में निवेश के लिए आमंत्रित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड का विकास मॉडल अब केवल पर्यटन और प्राकृतिक संसाधनों तक सीमित नहीं है। औद्योगिक विकास, स्टार्टअप, स्वरोजगार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्थानीय उत्पाद और पर्वतीय क्षेत्रों में नई आर्थिक गतिविधियों को जोड़कर राज्य संतुलित विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि निवेश और रोजगार के अवसरों का लाभ प्रदेश के मैदानी और पर्वतीय दोनों क्षेत्रों तक पहुंचे।

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