March 11, 2026 2:27 PM

उत्तराखंड में वनाग्नि रोकने के लिए ग्रामीणों से खरीदा गया 5 करोड़ 42 लाख रुपये का पिरूल, उपनल कर्मियों के वेतन पर भी सरकार का बड़ा फैसला

गैरसैंण: उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण विधानसभा परिसर में चल रहे बजट सत्र के दूसरे दिन वनाग्नि की रोकथाम को लेकर सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई। प्रश्नकाल के दौरान वन मंत्री सुबोध उनियाल ने सदन को बताया कि चीड़ के जंगलों में आग लगने के मुख्य कारणों को कम करने के लिए सरकार पिरूल (चीड़ की पत्ती) एकत्रित करने की योजना पर काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में ग्रामीणों से 5,532 टन पिरूल खरीदा गया है। अब इस लक्ष्य को बढ़ाकर 8,555 टन कर दिया गया है। सरकार की मंशा है कि पिरूल को जंगलों से हटाकर वनाग्नि की घटनाओं को न्यूनतम स्तर तक लाया जाए।

5 करोड़ 42 लाख रुपये का पिरूल खरीदा गया
वन मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर वनाग्नि रोकने के लिए कई गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। वन विभाग के माध्यम से पिछले एक वर्ष में ग्रामीणों से 5 करोड़ 42 लाख रुपये का पिरूल खरीदा गया है। इसके साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान भी चलाया जा रहा है।

फायर प्रबंधन समितियां गठित
सरकार की ओर से ग्राम प्रधानों की अध्यक्षता में फायर प्रबंधन समितियां भी गठित की गई हैं, जो वन विभाग के साथ मिलकर जंगलों को आग से बचाने के प्रयास कर रही हैं। अब तक 1,239 जागरूकता शिविर लगाए जा चुके हैं। इन समितियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत को 30 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।

फायर वाचर्स को 10 लाख रुपये का बीमा
वन मंत्री ने बताया कि वनाग्नि की घटनाओं के दौरान फायर वाचर्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पहली बार फायर वाचर्स के लिए 10 लाख रुपये का सामूहिक बीमा लागू किया है। पिछले वर्ष लगभग 5,600 फायर वाचर्स ने वनाग्नि को रोकने में अहम योगदान दिया था।

उपनल कर्मियों के लिए बजट में बड़ा प्रावधान
सदन में यह भी जानकारी दी गई कि राज्य सरकार ने वर्ष 2026–27 के बजट में पूर्व उपनल कर्मियों को समान कार्य के लिए समान वेतन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसके लिए बजट में 289 करोड़ 98 लाख 29 हजार रुपये का प्रावधान किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों और श्रमिकों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। पूर्व उपनल कर्मियों ने लंबे समय तक विभिन्न विभागों में सेवाएं दी हैं और उनके हितों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से समान कार्य के लिए समान वेतन की व्यवस्था लागू करने के लिए पर्याप्त बजट सुनिश्चित किया गया है।

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