August 30, 2025 4:05 PM

उत्तराखंड में बीजेपी नेता गिरफ्तार, लैंड फ्रॉड का आरोप, कुख्यात प्रवीण वाल्मीकि से भी जुड़े तार, बीजेपी ने किया पार्टी से निष्कासित

रुड़की: हरिद्वार जिले के रुड़की में देहरादून से आई एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) की टीम ने भाजपा पार्षद को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि पार्षद ने कुख्यात प्रवीण वाल्मीकि के साथ मिलकर एक महिला और उसके परिवार को डरा धमकाकर उसके नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन बेचने की साजिश की. इसी के साथ अन्य जमीनों के भी फर्जी कागजात तैयार कर बेचने की एसटीएफ की जांच में पुष्टि हुई है.

गंगनहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज: एसटीएफ ने पार्षद के खिलाफ गंगनहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज करा दिया है और पार्षद को अपने साथ देहरादून ले गई. उधर मामला संज्ञान में आने के बाद भाजपा ने पार्षद को पार्टी से निष्कासित कर दिया है. दरअसल, 27 अगस्त बुधवार देर शाम देहरादून से एसटीएफ की टीम रुड़की पहुंची.

भाजपा पार्षद मनीष से हुई पूछताछ: इसके बाद भाजपा पार्षद मनीष बोलर को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई. हालांकि, मनीष बोलर की गिरफ्तारी की खबर सुनकर वाल्मीकि समाज के लोग काफी संख्या में गंगनहर कोतवाली के बाहर जमा रहे, देर रात तक उनकी भीड़ कोतवाली के बाहर जमा रही.

पार्षद की गिरफ्तारी पर लोगों ने किया हंगामा: पुलिस अधिकारियों द्वारा उन्हें समझा-बुझाकर वापस भेजा गया. वहीं पार्षद से की गई पूछताछ के बाद एसटीएफ निरीक्षक नंद किशोर भट्ट ने गंगनहर कोतवाली पुलिस को तहरीर दी. तहरीर में बताया गया कि उन्हें शिकायती पत्र मिला था जिसमें रुड़की के रामनगर स्थित नई वाल्मीकि बस्ती में रहने वाले कुख्यात बदमाश प्रवीण वाल्मीकि के रिश्तेदार (भतीजे) मनीष बोलर (वर्तमान में भाजपा पार्षद) और उसके अन्य सहयोगी राजकुमार व अंकित के खिलाफ आरोप लगाए गए थे.

प्रवीण वाल्मीकि के नाम का किया इस्तेमाल: आरोप है कि ये लोग रुड़की और हरिद्वार क्षेत्र में संगठित आपराधिक गिरोह बनाकर लोगों को प्रवीण वाल्मीकि के नाम से जान से मारने की धमकी देकर उनकी जमीनों पर कब्जा कर खरीद फरोख्त का अवैध धंधा कर रहे हैं. जब इस मामले की जांच की गई तो सामने आया कि एक महिला रेखा (पत्नी स्वर्गीय श्याम बिहारी निवासी ग्राम सुनहरा) के ऊपर भी दबाव बनाकर उनकी जमीन का सौदा किया गया.

रेखा के देवर की साल 2018 में हुई थी हत्या: रेखा के पति का देहांत साल 2014 में हो गया था और उसकी काफी संपत्ति रुड़की के सुनहरा गांव में स्थित है. तहरीर में बताया गया है कि, मनीष बोलर, राजकुमार और इनके अन्य साथियों ने रेखा पर दबाव बनाया कि वो जमीन उनके नाम कर दे. और अगर उसने किसी अन्य व्यक्ति को जमीन बेची तो इसका अंजाम अच्छा नहीं होगा. आरोप है कि जब इस बात का विरोध रेखा के देवर कृष्ण गोपाल ने किया तो प्रवीण वाल्मीकि ने अपने शूटरों द्वारा साल 2018 में कृष्ण गोपाल की गोली मारकर हत्या करवा दी थी.

साल 2019 में रेखा के भाई पर भी हुआ था हमला: वहीं, रेखा का भाई सुभाष मामले में पैरवी कर रहा था. उसके ऊपर साल 2019 में मनीष बोलर और उसके साथियों द्वारा जानलेवा हमला किया गया था. हालांकि, इस हमले में उसकी जान बच गई. आरोप है कि इसके बाद रेखा से पांच लाख रुपए की फिरौती मांगने और न देने पर उसे व उसके बच्चों को जान से मारने की धमकी दी गई. इस मामले में भी मनीष बोलर और अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था.

डर से रेखा ने छोड़ दिया था मकान: इस घटना के बाद रेखा ने डर से अपना मकान छोड़ दिया था और किसी अज्ञात स्थान पर रहने लगी थी. इसी बात का फायदा उठाकर प्रवीण वाल्मीकि, मनीष बोलर और उसके गैंग के अन्य सदस्यों ने रेखा की जमीनों को फर्जी तरीके से बेचने का प्लान बनाया.

फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी बनाकर किया खेल: प्रवीण वाल्मीकि और मनीष बोलर ने अपने साथियों के साथ मिलकर एक महिला को रेखा के रूप में दिखाया. इसके बाद रेखा के पति के मृत्यु प्रमाण पत्र का इस्तेमाल कर फर्जी महिला के जरिए एक पावर ऑफ अटॉर्नी प्रवीण वाल्मीकि और मनीष बोलर के नजदीकी जानकार पंकज कुमार अष्टवाल निवासी ग्राम सुनहरा के नाम बनवाई गई. इसके बाद इस पावर ऑफ अटॉर्नी से दो प्लॉट बेचे गए.

रेखा की जमीन फर्जी तरीके से बेचने का किया प्रयास: इसके बाद गुरमीत कौर और नजमा (पति नदीम) ने पुलिस को एक शिकायत पत्र दिया. दोनों ने अपनी शिकायत में बताया कि मनीष बोलर और राजकुमार से उन्होंने जमीन खरीदने से लिए संपर्क किया था, जिसका सौदा कुल 80 लाख रुपए में तय हुआ. रजिस्ट्री के दौरान इन लोगों ने 12 लाख रुपए नकद दिए, बाकी की शेष राशि चेक के माध्यम से देनी तय की गई. हालांकि, जब उन्हें ठगी का अहसास हुआ तो उन्होंने चेक रोक लिए और जमीन नहीं ली. इसके बाद रुड़की के श्याम नगर कॉलोनी स्थित एक प्लॉट (करीब 6 हजार 166 वर्ग फीट) की रजिस्ट्री इश्तियाक (पुत्र जफर) और गुलफाम (पुत्र फैयाज निवासी ग्राम माधोपुर कोतवाली गंगनहर रुड़की) के नाम करीब 58 लाख रुपए में की गई.

पूरे खेल में मनीष का नाम सामने आया: इसी प्रकार के एक और अन्य प्रकरण में इस गिरोह ने निर्देश (पत्नी रजनीश) को मीनाक्षी जैसिया बनाकर एक प्लॉट विक्की (पुत्र महेश) और संदीप (पुत्र आसाराम) को बेच दिया. ये वही महिला है जिसे पहले नकली रेखा बनाया गया था. इसके बाद इस रजिस्ट्री की जांच करने में सामने आया कि जहां मीनाक्षी के नाम का इस्तेमाल हुआ है, वहां पर मोबाइल नंबर मनीष बोलर का है.

रेखा को लगातार मिल रही थी धमकी: एसटीएफ की जांच में ये भी सामने आया कि पिछले 2-3 माह (जुलाई-अगस्त) के अंदर प्रवीण वाल्मीकि और मनीष बोलर अपने लोगों के साथ मिलकर रेखा (पत्नी स्वर्गीय श्याम बिहारी) व उसके बच्चों को लगातार धमका रहा है. जान से मारने की धमकी भी दी जा रही है.

आरोपी मनीष को अपने साथ देहरादून ले गई एसटीएफ: जांच में ये भी सामने आया है कि तथ्यों के आधार पर प्रवीण वाल्मिकी, मनीष बोलर, पंकज अष्टवाल, राजकुमार, अंकित, मोनिका और अन्य ने रेखा की फर्जी पावर ऑफ अटार्नी बनाकर पंकज अष्टवाल को दी. इस मामले में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 और 120 बी भारतीय दंड संहिता (IPC) और धारा 111, 351, 352 भारतीय न्याय संहिता (BNS) में गंगनहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया. गंगनहर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक आरके सकलानी ने बताया कि एसटीएफ के पास ये पूरा मामला है. पूछताछ के लिए मनीष बोलर को टीम अपने साथ देहरादून लेकर गई है.

बीजेपी ने मनीष को पार्टी से किया निष्कासित: वहीं, ये मामला सामने आने के बाद बीजेपी ने पार्षद मनीष बोलर को पार्टी से निष्कासित कर दिया है. मनीष रुड़की नगर निगम वार्ड नंबर 38 से भाजपा के टिकट पर जीतकर पार्षद बना था. रुड़की बीजेपी जिला अध्यक्ष डॉ मधु सिंह ने मनीष बोलर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित करने का पत्र जारी किया है.

पत्र में कहा गया है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर मनीष बोलर को पार्टी से निष्कासित किया जाता है. वहीं पार्षद की गिरफ्तारी से गुस्साए वाल्मीकि समाज के लोगों ने देर रात तक गंगनहर कोतवाली के बाहर डेरा जमाए रखा, जिसके बाद पुलिस ने बमुश्किल उन्हें समझा-बुझाकर वापस भेज दिया, लेकिन सुबह से ही रुड़की नगर निगम कार्यालय के बाहर एकत्र होना शुरू हो गए.

इतना ही नहीं, निगम के सफाई कर्मियों ने गाड़ियों के चक्के जाम कर सफाई व्यवस्था भी ठप रखी. करीब डेढ़ घंटे तक उनके द्वारा प्रदर्शन किया गया. इस दौरान रास्ते से आवागमन भी पूरी तरह से बाधित रहा. प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप था कि इस प्रकार एक जनप्रतिनिधि के खिलाफ की गई कार्रवाई ठीक नहीं है. मौके पर पहुंचे पुलिस के अधिकारियों ने उन्हें समझाया तब जाकर वह शांत हुए. जिसके बाद प्रदर्शन कर रहे लोग मौके से हटे. अब वह एसपी देहात शेखर चंद्र सुयाल से मिलेंगे.

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