July 18, 2026 3:11 AM

अब क्या करेगी उत्तराखंड सरकार ? अन्य राज्यों के बिजली कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल का किया समर्थन, उत्तराखंड मे ड्यूटी करने से भी किया इन्कार

देहरादून:  प्रदेश में बिजली कर्मियों की हड़ताल को लेकर सरकार की चुनौती बढ़ गई है। अन्य राज्यों के बिजली कर्मचारी संगठनों ने खुलकर समर्थन देते हुए उत्तराखंड के कार्मिकों के आंदोलन को उचित करार दिया है। साथ ही उत्तराखंड में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत ड्यूटी करने से भी इन्कार कर दिया है। उत्तराखंड में छह अक्टूबर से कार्मिकों की प्रस्तावित हड़ताल के मद्देनजर सरकार ने पड़ोसी राज्यों से कार्मिक मांगे हैं।

उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा की ओर से पुरानी एसीपी व्यवस्था, पुरानी पेंशन, संविदा कार्मिकों के नियमितीकरण समेत 14 सूत्रीय मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन किया जा रहा है। शासन और निगम प्रबंधन के साथ हुई वार्ता में कोई हल न निकलने के बाद कार्मिकों ने छह अक्टूबर से बेमियादी हड़ताल का एलान किया है। इसे देखते हुए शासन ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के बिजल कर्मियों को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत उत्तराखंड में तैनात करने की योजना बनाई है। इसके लिए तीनों राज्यों से पत्रचार किया गया है।

अब इस पर अन्य राज्यों के बिजली कर्मचारी संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि उत्तर प्रदेश के समस्त संगठनों ने सहमति जताई है कि उत्तराखंड के बिजली कार्मिकों का आंदोलन जायज है और वे किसी भी सूरत में हड़ताल के दौरान उत्तराखंड में ड्यूटी नहीं देंगे। उप्र राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ ने भी उत्तराखंड में ड्यूटी देने से इन्कार किया है। आल इंडिया फेडरेशन आफ पावर डिप्लोमा इंजीनियर्स ने कहा कि कई सालों से उत्तराखंड में बिजली कर्मियों की अनदेखी की जा रही है और अब उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

जल विद्युत निगम ने की अनुशासनात्मक कार्रवाई

आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) और आचरण नियमावली के प्रविधानों के उल्लंघन का हवाला देते हुए जल विद्युत निगम ने करीब पौने दो सौ कार्मिकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। उन्होंने हड़ताल में शामिल हो रहे कार्मिकों सूची तैयार कर उन पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। यूजेवीएन के अधिशासी निदेशक (मानव संसाधन) की ओर से जारी पत्र में कुल 189 कार्मिकों के नाम शामिल हैं। जिन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई है। पत्र में लिखा है कि हड़ताल में शामिल कार्मिकों पर कार्य नहीं तो वेतन नहीं या सेवा व्यवधान के सिद्धांत के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा इसके अलावा निम्नतर पद पर अवनति, सेवा समाप्ति या बर्खास्तगी की भी कार्रवाई की जा सकती है। यूजेवीएनएल मुख्यालय से उत्तराखंड विद्युत अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा को पत्र लिख आंदोलन स्थगित करने का आग्रह किया गया है। निगम का कहना है कि कार्मिकों की मांगों को लेकर प्रबंधन और शासन स्तर पर पत्रचार समेत अन्य कार्यवाही गतिमान है। मांगों के निस्तारण के लिए समय दिया जाना चाहिए। ऐसे में फिलहाल कार्मिक अपने आंदोलन को स्थगित कर दें।

इंजीनियर्स फेडरेशन भी होगा आंदोलन में शामिल

उत्तराखंड इंजीनियर्स फेडरेशन ने बिजली कर्मियों की मांगों का समर्थन करते हुए आंदोलन में शामिल होने का एलान किया है। साथ ही शासन के अन्य विभागों के अभियंताओं को बिजली संबंधित कार्यो में लगाने के फरमान का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इसे अभियंताओं की जान जोखिम में डालने का निर्णय करार दिया।

इंजीनियर्स फेडरेशन की ओर से रविवार शाम को आनलाइन बैठक की गई। फेडरेशन के प्रांतीय महासचिव जितेंद्र सिंह देव ने कहा 14 वर्षो से न्यायपूर्ण मांगों को लेकर ऊर्जा निगम के अभियंता एवं कार्मिक लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। जबकि, शासन की ओर से उन्हें कोरे आश्वासन दिए जा रहे हैं। वर्ष 2017 से अब तक कई बार शासन और मंत्रियों के साथ हुए समझौतों को कभी लागू नहीं किया गया। बताया कि बैठक में निर्णय लिया गया कि फेडरेशन ने ऊर्जा निगम कर्मियों के आंदोलन को नैतिक समर्थन दे रहा है और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर वार्ता का समय मांगा है।

जानमाल का खतरा है अभियंताओं की तैनाती

फेडरेशन से संबंधित सभी विभागों के पदाधिकारियों ने ऊर्जा निगमों की वैकल्पिक व्यवस्था में ड्यूटी लगाए जाने का विरोध किया है। उन्होंने अन्य विभागों के अभियंताओं से बिजली संबंधी कार्य कराने को जानमाल का जोखिम करार दिया है। उन्होंने कहा कि पांच अक्टूबर को प्रस्तावित रैलियों में फेडरेशन के सभी विभागों के अभियंता शामिल होंगे। इसके बाद सभी अभियंता काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे।

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