January 24, 2026 4:52 AM

पस्त हो गए दुश्मनों के हौंसले : सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के आदेश पर खुर्शीद मंसूरी दोबारा बने बिजनौर के जिला उपाध्यक्ष, जानिए कौन हैं खुर्शीद मंसूरी ?

बिजनौर: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्य्क्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष म0 नरेश उत्तम पटेल की मौजूदगी मे साहनपुर, नजीबाबाद के पूर्व चेयरमैन खुर्शीद मंसूरी को समाजवादी पार्टी का जिला उपाध्यक्ष  मनोनीत किया गया। रविवार  को  लखनऊ पाटीँ कार्यालय में राष्ट्रीय अध्यक्ष के  निर्देश पर सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम  ने कस्बा साहनपुर के पूर्व चैयरमैन  खुर्शीद मंसूरी को उनके कार्य को देखते हुए उन्हें जिले भर की जिम्मेदारी से नवाजा है।  खुर्शीद मंसूरी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी व प्रदेश अध्यक्ष को भरोसा जताया है कि पाटीँ के लिए आगामी  विधानसभा चुनाव  मे दिन रात मेहनत करके प्रदेश मे समाजवादी पाटीँ की सरकार बनाने व राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी को मुख्यमंत्री बनाने मे सहयोग करेंगे।  वही खुर्शीद मंसूरी के जिला उपाध्यक्ष बनने पर उनके  समर्थकों मे खुशी का महौल है। आपको बता दें खुर्शीद मंसूरी के मुताबिक पहले भी उन्हे पार्टी मे ये पद दिया गया था लेकिन पार्टी के ही कुछ लोगों ने उनकी रिपोर्ट पार्टी नेत्रत्व के सम्मुख गलत पेश की थी जिसके चलते उन्हे पद से हटाया गया था। अब पार्टी ने उच्च स्तरीय जांच कराई तो उसमे पार्टी के पदाधिकारियों ने पाया की खुर्शीद मंसूरी साफ सुथरी छवि वाले नेता हैं और उनके बारे मे जो जानकारी मिली थी वो गलत है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी खुर्शीद मंसूरी के  बारे मे गलत जानकारी देने वाले नेताओं के खिलाफ भी एक्शन ले सकती है ।

 कौन हैं खुर्शीद मंसूरी

आपको खुर्शीद मंसूरी के बारे मे बता दूँ वो युवा अवस्था से ही समाज सेवा मे लगे हैं जिसे अमली जामा पहनाने के लिए साल 2010 मे उन्होने सपा की सदस्यता ली उसके बाद उनकी मेहनत और लगन रंग लाई तो 2012 मे मंसूरी कस्बा साहनपुर के चेयरमैन बने 2017 मे उन्होने फिर किस्मत आजमाई लेकिन वोट कटवा प्रतियाशियों के चलते उन्हे मात्र 200 वोट से हार का सामना करना पड़ा। लेकिन राजनीतिक विश्लेषण मे जहां तक देखा गया है वो हारकर भी जीते उत्तराखंड मे जैसे हरीश रावत को आज भी देश के कई हिस्सों मे सीएम समझा जाता है (हालांकि उत्तराखंड के वर्तमान सीएम पुष्कर सिंह धामी हैं) वैसे ही खुर्शीद मंसूरी को पूरे जिला बिजनौर मे आज भी लोग चेयरमैन ही मानते हैं। राजनीति मे मंसूरी इतने सक्रिय हैं की समाजवादी पार्टी की तरफ से या जनता के हित के लिए वो रैलियाँ और धरना प्रदर्शन मे भी सबसे आगे रहते हैं। कहा जाता है की जितनी बात मंसूरी की नजीबाबाद मे रहकर लखनऊ मे बैठे नेताओं से है अगर लखनऊ मे उनका निवास होता तो वो समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के नेताओं मे शुमार किये जाते। और पार्टी मे बड़े पदाधिकारी होते

कोरोनाकाल मे खुर्शीद मंसूरी ने निभाया इंसानियत का फर्ज

खुर्शीद मंसूरी वर्तमान मे न कोई चेयरमैन हैं न विधायक और न ही कोई सांसद वो फिलहाल समाजवादी पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता और एक अच्छा इंसान होने का फर्ज निभा रहे हैं। देश के साथ शहर मे भी कोरोना का कहर जारी था जब लोग आक्सीजन के लिए इधर उधर भाग रहे थे और हमारी विधान सभा के रसूखदार नेता कहीं नज़र नहीं आए तो उन्होने आगे बढ़कर लोगों की जो मदद की वो सरहनीय थी। बीते पूरे रमज़ान मे मंसूरी ने लोगों की संस अटकने नहीं दी उनको ये मतलब नहीं रहा की कौन कहाँ से आया है या कौन किस धर्म और जाती का है सर्वधर्म संभाव वाली नीति अपनाकर जनता की जो सेवा की, जनता को जो आक्सीजन के जरिये साँसे दिन वाकई कबीले तरीफ थी। उनके यहाँ अगर कोई आक्सीजन लेने गया तो खाली हाथ नहीं लौटा और न ही निराश होकर लौटा । उन्होने बीते रमज़ान मे इस्लामी धर्म निभाने के साथ साथ इंसानियत का भी फर्ज अदा किया। उन्होने सैकड़ों लोगों को आक्सीजन के सिलेन्डर मुहैया कराएं जिससे लोगों की जान बच पाई और लोग मंसूरी को दुआ देकर गए। मंसूरी ने न रात देखा न दिन 24 घंटे जनता की सेवा मे लगे रहे आधी – आधी रात को मंसूरी ने लोगों को आक्सीजन उपलब्ध कराया था। लोग उन्हे दुआ देते देते नहीं थक रहे थे । कुछ लोगों ने तो यहाँ तक बोला था की आप ही हमारे लिए सांसद और विधायक हो जो मदद हमे उनसे मिलनी चाहिए थी वो आपसे मिली।

लोग विधायक/ सांसदो का नाम तक नहीं जानते

आपको बता दें खुर्शीद मंसूरी के मुताबिक जब लोग आक्सीजन लेने पहुँच रहे थे तो दर्जनो लोगों से पूछा गया की आपका विधायक और सांसद कौन है लेकिन लोगों को ये तक नहीं पता की उनके विधायक और क्षेत्रीय सांसद कौन हैं। हाँ बस लोग इतना बता पाएँ की 4 साल पहले लोग वोट मांगने तो आए थे उसके बाद न तो लोगों ने उनकी शक्ल ही देखी और न ही उसके बाद कोई गाँव मे व्यवस्था का जायजा लेने ही पहुंचा। सवाल ये है की क्या सिर्फ जनता का मूर्ख वोट के लिए बनता रहेगा। ये नजीबाबाद विधान सभा के लोगों की विडम्बना रही है की न तो सांसद ही इधर का रुख करते हैं और न ही विधायक का किसी चीज़ मे हस्तक्षेप होता है। आखिर लोग नेताओं को सिर्फ कुर्सी पर बैठने के लिए वोट देते हैं? क्या हमारे प्रतिनिधियों की जनता के प्रति कोई ज़िम्मेदारी है?

2022 के चुनाव मे इस बार होगा आर पार

आपको बता दें की 2022 मे विधानसभा का चुनाव होना है और इस बार जनता बदलाव चाहती है इस कोरोना के कहर ने लोगों को ये सिखा और और बता दिया है की कौन नेता अपना है और कौन पराया और जनता का मूड अब बदल चुका है इस बार जनता एक तरफा वोट करने के मूड मे है कई साल से शहर मे दो कुर्सियों पर दो ही लोगों का कब्जा है जो जनता अब बदलना चाहती है। और अगर हमारे प्रतिनिधियों ने अगर अब भी आँख न खोलीं तो उनका आगामी चुनाव मे वोट मांगने का कोई मुंह नहीं रहेगा। आपको बता दें की कुछ लोगों का तो ये तक कहना है की अगर इस बार हमारे सामने वो प्रतिनिधि वोट मांगने आया जिसके कानों तक कोरोनाकाल मे हमारी आवाज़ नहीं गूंजी तो उसका खुले तौर पर विरोध किया जाएगा और उसके नाम का पोस्टर लगाया जाएगा।

बहरहाल कुछ भी हो लेकिन जनता जब किसी प्रतिनिधि को जिताकर कुर्सी पर बैठाती है तो जनता को ये आस होती है की वो प्रतिनिधि उसके काम आएगा लेकिन अक्सर ऐसा नहीं होता, हर बार यही देखने को मिलता है की जनता हर बार ठगी का शिकार होती है। जबकी ऐसा नहीं होना चाहिए।

 

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