May 25, 2024 1:51 PM

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क्यों कम हो रही लोगों की उम्र? Scientist ने जैसे ही बताया, सरकार ने छीन ली नौकरी, पढ़ें कहाँ का है मामला

न्यूज़ डेस्क: रूस के शिक्षा और विज्ञान मंत्रालय ने हाल ही में रूसी विज्ञान अकादमी के इंस्टीट्यूट ऑफ जनरल जेनेटिक्स के निदेशक को कथित तौर पर एक बयान के चलते नौकरी से निकाल दिया.Geneticist Alexander Kudryavtsev (अलेक्जेंडर कुद्रियात्सेव) को जून 2021 में रूसी विज्ञान अकादमी के जनरल जेनेटिक्स का डायरेक्टर बनाया गया था.

उन्हें 2027 तक अपना कार्यभार पूरा करना था. लेकिन पिछले महीने, रूस के शिक्षा और विज्ञान मंत्रालय ने घोषणा की कि अलेक्जेंडर को नौकरी से दिया गया है.

मनुष्य 900 साल तक जीवित रहते थे

पिछले साल मार्च में तीसरे अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक और धार्मिक सम्मेलन ‘गॉड – मैन – वर्ल्ड’ के दौरान दिए गए विवादास्पद बयानों के चलते उन्हें नौकरी से निकाला गया.

रूसी वैज्ञानिक ने अपने बयान में दावा किया था कि कि बाइबिल से पहले, मनुष्य 900 साल तक जीवित रहते थे, लेकिन पितरों के और अपने पाप के कारण लोगों का लाइफस्पैन कम हो गया है.

जीनोम को प्रभावित करते हैं पाप

सम्मेलन के दौरान बोलते हुए, अलेक्जेंडर कुद्रियात्सेव ने यह भी कहा कि पाप मानव जीनोम को प्रभावित करते हैं, जिससे वे नेगेटिव हेल्थ रिजल्ट्स के प्रति अधिक सेंसिटिव हो जाते हैं.

अलेक्जेंडर ने कहा कि भले ही नास्तिक वैज्ञानिक जेनेटिक डिके के लिए रेडिएशन या प्रदूषण जैसे फैक्टर्स को जिम्मेदार ठहराएंगे लेकिन उनका मानना ​​है कि यह पाप के कारण होता है.
अलेक्जेंडर ने कहा, ‘ये उस तरह के म्यूटेशन हैं जो जेनेटिक डॉक्टर हर दिन मरीजों के साथ काम करते समय पाते हैं. नास्तिक वैज्ञानिक आपको बताएंगे कि वास्तव में यह रेडिएशन या प्रदूषण की वजह से होता है.

फिर भी, मेरा विश्वास है कि इस तरह का विनाश पाप से शुरू होता है, पैतृक पाप से बढ़ता है, और व्यक्तिगत पाप से भी. वैज्ञानिक ने अपने दर्शकों को यह भी चेतावनी दी कि वे पाप न करें, क्योंकि इसका असर उनकी सात पीढ़ियों तक की संतानों पर भी पड़ सकता है.

बयान का कोई वैज्ञानिक पक्ष नहीं

उन्होंने कहा- मैं तथाकथित बुरी आदतों के हानिकारक प्रभाव पर जोर देना चाहता हूं – जिसे धर्मशास्त्री पाप कहते हैं. वे जीनोम को भी प्रभावित करते हैं.

अलेक्जेंडर को नौकरी से निकालने वाले आयोग ने कहा कि उनके बयानों का कोई वैज्ञानिक पक्ष नहीं है.

वो केवल बाइबल पढ़ रहे थे. लेकिन विज्ञान ने बाइबिल के समय से काफी प्रगति की है और जानता है कि पृथ्वी कितने वर्षों से अस्तित्व में है जब मनुष्य एक प्रजाति के रूप में प्रकट हुआ था इत्यादि।

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