August 30, 2025 11:00 PM

EXCLUSIVE INSIDE STORY: जनता का था दबाव, वसीम कुरैशी लड़ सकते हैं चुनाव ! बीजेपी से नहीं मिला था टिकट…

निर्भीक खबर के लिये अनुपम अग्रवाल के साथ तारिक़ अंसारी की रिपोर्ट

नजीबाबाद: राजनीति का ऊंट कब किस करवट बैठे कुछ कहा नही जा सकता बहराल मौका नगरपालिका चुनाव का है और नजीबाबाद से कई कार्यकर्ताओं को अपनी अपनी पार्टी से टिकट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन किसी भी चुनाव में एक अनार सौ बीमार वाली स्थिति होती है पार्टी से एक को टिकट मिलना होता है लेकिन दर्जनों दावेदार अपनेआप को टिकट मिलने की उम्मीद जताते हैं। नजीबाबाद में इस बार कई प्रतियाशी ऐसे हैं जो पार्टी से टिकट न मिलने के कारण निर्दलीय ही चुनावी मैदान में उतारने को बेताब हैं, और अपनी ही पार्टी से नामित उम्मीदवार के सामने निर्दलीय नामांकन करा रहे हैं। और मुकाबला करने का दम भर रहे हैं।

वसीम कुरैशी ने किया निर्दलीय नामांकन

आपको बता दें वसीम कुरैशी ने बीजेपी के एक कर्मठ कार्यकर्ता के तौर पर काम किया है समाज सेवा की है लेकिन बीजेपी से उन्हें टिकट नही मिला जबकि शहरवासियों के मुताबिक इस बार अगर बीजेपी अल्पसंख्यक उम्मीदवार उतारती तो उसकी जीत होना तय था क्योंकि एक तो शहर में बीजेपी के फिक्स वोट जो कैंडिडेट को मिलते और दूसरे मुस्लिम वोट जो अल्पसंख्यक उम्मीदवार के साथ सहानुभूति के तौर पर आते । बहरहाल पार्टी आलाकमान कोई भी टिकट वितरण सोच समझकर ही करती है लेकिन टिकट न मिलने के कारण अब फ़िल्म निर्माता एवं भाजपा कार्यकर्ता वसीम कुरैशी ने आज नगर पालिका के चेयरमैन पद के लिए निर्दलीय नामांकन कराया है। वसीम कुरैशी ने बीजेपी से टिकट न मिलने पर चुनाव लडने से साफ मना कर दिया था लेकिन कुरैशी के मुताबिक उनके मना करने पर सुबह से उनके कार्य स्थल पर उनके चाहने वालो की भीड़ जमा हो गई और अत्यधिक दवाब के चलते उन्होंने नामांकन दर्ज कराना पड़ा अभी भी उनका कहना है में निर्दलीय चुनाव लडने के पक्ष में नहीं हू बाकी नजीबाबाद की आवाम जिसने मुझे अपनाया है वह फैसला करेगी । लेकिन यहां एक बात साफ हो जाती है कि निर्दलीय नामांकन के बाद कुरैशी नगरपालिका अध्यक्ष नजीबाबाद के अन्य उम्मीदवारों के साथ ही बीजेपी उम्मीदवार के सामने भी आ गये हैं यानी अब तक तो कुरैशी ने जो बीजेपी के कार्यकर्ता के तौर पर काम किया लेकिन अब बीजेपी के ही प्रतियाशी के सामने मुकाबले पर आ गए हैं यानी अब वो बीजेपी कार्यकर्ता के तौर पर बीजेपी के प्रतियाशी को सपोर्ट नही करेंगे बल्कि उसके खिलाफ लड़ेंगे।

कुरैशी को बैठना चाहिये था खामोश !

कुछ राजनीतिक विषेशज्ञों का ये भी मानना है कि वसीम कुरैशी को निर्दलीय नामांकन नही दाखिल करना चाहिये था बल्कि पार्टी में बना रहना चाहिये था क्योंकि वसीम कुरैशी जिस तरह लोंगों के दिल पर छाए उन्होने समाज सेवा कर खुद को चमकाया उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी से टिकट की मांग करनी चाहिये थी और बीजेपी में बने रहना चाहिये था हालांकि ये अभी साफ नही है कि उन्होंने बीजेपी में कार्यकर्ता पद से इस्तीफा दिया है या नही। आपको बता दें कि नजीबाबाद विधानसभा सीट पर कई दशकों से सपा और सपा का कब्जा है फिलहाल सपा से तसलीम अहमद विधायक हैं लेकिन खबरों के मुताबिक बीजेपी टिकट देने की रणनीति में बदलाव कर ज़्यादा से ज़्यादा अल्पसंख्यकों को भी टिकट का उम्मीदवार बनाएगी ऐसा भी नही है अभी बीजेपी अल्पसंख्यक को टिकट नही देती। जानकारों के मुताबिक अगर वसीम कुरैशी नगरपालिका में निर्दलीय नामांकन न कर अगले विधानसभा चुनाव में बीजेपी में अपनी साख बढ़ाकर चुनाव की तैयारी करते तो ज़्यादा अच्छा रहता बहरहाल कुछ भी हो जिसे राजनीति का चस्का लगता है वो तो चुनावी मैदान में कूदता ही है फिलहाल कुरैशी के मुताबिक जनता के कहने पर उन्होने निर्दलीय नामांकन भरा है लेकिन देखने वाली बात ये होगी कि बीजेपी से टिकट न मिलने पर निर्दलीय लड़ने वाले वसीम कुरैशी को जनता कितने वोट देती है । ऐसा भी सम्भव है कि बीजेपी से कुरैशी पर नामांकन वापस लेने का दबाव डाला जाए और वो नामांकन वापिस ले लें। और फिर बीजेपी प्रतियाशी को चुनाव लड़ाकर पार्टी में और मजबूती दर्ज कराएं। क्योंकि राजनीति में कब क्या हो जाये कुछ कहा नही जा सकता सिर्फ कयास लगाए जा सकते हैं।

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