बिजनौर: यूपी में मतदाताओं द्वारा ‘इनमें से कोई नहीं’ यानी नोटा का विकल्प चुनना कई सीटों के परिणाम पर बड़ा असर डालने वाला साबित हुआ। कम अंतर से जीती गई सीटों पर यह असर सबसे दिखा। पढ़िए ऐसी ही कुछ सीटों के बारे में जहां मतदाताओं ने अगर नोटा न चुना होता तो शायद प्रत्याशियों के चुनाव परिणाम ही बदल सकते थे।

बड़ौत (बागपत) : भाजपा के कृष्णपाल मलिक ने रालोद के जयवीर को 315 वोटों से हराया। यहां नोटा पर 579 वोट डले। कांग्रेस के राहुल कुमार को 1,849 और आप के सुधीर को 709 वोट मिले।
नहटौर (बिजनौर) : भाजपा के ओम कुमार 258 वोट से जीते। रालोद के मुंशीराम को हराया। 1057 ने नोटा को चुना।
चांदपुर (बिजनौर) : सपा के स्वामी ओमवेश ने भाजपा के कमलेश सैनी को 234 वोट से हराया। नोटा पर 854 वोट पड़े। एआईएमआई ने 1,586 वोट पाए तो आआपा ने 364।
छिबरामऊ (कन्नौज) : भाजपा की अर्चना पांडेय सपा के अरविंद सिंह यादव से महज 1,111 वोट ज्यादा लेकर जीतीं। यहां भी नोटा में 1775 वोट पड़े।
कटरा (शाहजहांपुर) : भाजपा के वीर विक्रम सिंह ने 357 वोट से सपा के राजेश यादव को हराया। नोटा में 1091 वोट पड़े।
नकुड़ (सहारनपुर) : भाजपा के मुकेश चौधरी 315 वोट से जीते। समाजवादी पार्टी के धर्म सिंह सैनी हारे। नोटा में 710 वोट।
एआईएमआईएम ने 3593 वोट पाए।
रामनगर (बाराबंकी) : सपा के फरीद महफूज ने भाजपा के शरद अवस्थी को 261 वोट से हराया। यहां नोटा में 1,822 वोट पड़े हैं।





