March 10, 2026 5:59 PM

पिरान कलियर की इन पांच मजारों पर जियारत से पूरी हो जाती हैं मुरादें, मिट जाते हैं सारे दुख

हरिद्वार: रुड़की से सात किलोमीटर दूर स्थित पिरान कलियर विश्वविख्यात धार्मिक स्थल है। यहां सभी धर्मों के लोग अपनी अपनी मुरादें लेकर आते हैं। कहते हैं कि यहां पर हर किसी की मुराद पूरी होती है। इस धर्मनगरी में मुख्य मजार साबिर पाक की है। इनके अलावा चार अन्य शख्सियत की मजारे भी हैं। इन पर जाकर अकीदतमंदों को रूहानियत का इल्म होता है। हर साल यहां इस्लामिक कैलेंडर के रबीउलअव्वल के माह में साबिर पाक का सालाना उर्स का आयोजन होता है, जिसमें देश विदेश से जायरीन पहुंचते हैं।

कलियर की इन दरगाहों पर पूरी होती हैं मुरादें

1- साबिर पाक : इन्हें हजरत अलाउद्दीन अली अहमद साबिर कलियरी भी कहा जाता है। कलियर में इनकी दरगाह को प्रमुखता दी जाती है और आने वाले जायरीन सबसे पहले इनकी जियारत करते हैं। साथ ही चादर पेश कर मुरादें मांगते हैं और प्रसाद पेश कर फैज पाते हैं।

साबिर पाक के बारे में प्रचलित है कि आप ने 12 साल तक मात्र गुल्लर खाकर अपना जीवन यापन किया और गरीब लोगों की सेवा की। खुद भूखे रहे और लोगों को लंगर खिलाया, जिस वजह से इनका नाम साबिर पाक पड़ा। इनके दर्जनों ऐसे किस्से मशहूर हैं।

2- इमाम साहब : इन्हें हजरत इमाम अबू सालेह रहमतुल्लाह अलैहि कहा जाता है। ये उसूलों के पक्के और कौम के खिदमतगार थे। इनके दर्जनों ऐसे किस्से हैं, जिन्हें आज भी लोग याद करते हैं। जियारत के लिए आने वाले लोग साबिर साहब की दरगाह पर जियारत करने के साथ-साथ दरगाह इमाम साहब की जियारत भी करते हैं।

3- किलकिली साहब : हजरत किलकिली साहब रहमतुल्लाह अलैहि के नाम से जाने वाली ये शख्सियत भी अपने आप में अपना अलग ही रुतबा रखते हैं। इनके बारे में कहा जाता है कि जब यहां के रजा ने इंसानियत को शर्मसार कर डाला तो उन्होंने गुस्से में एक ऐसी चीख मारी कि सारा इलाका ही थर्रा उठा और उन्हें लोग किलकिली शाह के नाम से पुकारने लगे

4- पीर गायब अली साहब : हजरत पीर गायब अली साहब के नाम से जाने जाने वाले संत की मजार पर लोग अपने चेहरे या किसी और जगह पर निकल आए मस्सों, गांठ से निजात पाने के लिए नमक और झाड़ू चढ़ाकर अपने लिए दुआ मांगते हैं। लोगों का मानना है कि ऐसा करने से परेशानी से निजात मिल जाती है।

5- अबदाल साहब : हजरत अबदाल साहब रहमतुल्लाह अलैहि की मजार पर लोग अपनी परेशानियों की एक लिस्ट बनाकर वहां छोड़कर आ जाते हैं। कहते हैं कि कुछ ही दिनों में उनकी परेशानी दूर हो जाती है। अपनी तमाम परेशानियों के चलते यहां आने वाले जायरीन अबदाल साहब की दरगाह पर जियारत के लिए जरूर जाते हैं।

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