September 21, 2026 1:06 PM

ताजमहल विवाद पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी- आज आप कह रहे 22 कमरे खुलवाएं, कल कहेंगे जज का चैंबर…

नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश स्थित आगरा में दुनिया के अजूबे में शामिल ताजमहल के 22 कमरों को खोले जाने की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में आज सुनवाई हुई. इस याचिका में याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से मांग की गई थी कि सालों से बंद पड़े ताजमहल के 22 कमरों को खुलवाया जाए और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (ASI) से उसकी जांच कराई जाए. इस मामले में कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि  याचिकाकर्ता अपनी याचिका तक ही सीमित रहें. कोर्ट ने कहा कि आप आज  ताजमहल के कमरे देखने की मांग कर रहे हैं कल को आप कहेंगे कि हमें जज के चेंबर में को भी देखने जाना है. इसीलिए पहले जाकर ताजमहल के बारे में पढ़ें फिर आएं.

कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कह-जाइए, जाकर शोध कीजिए

अदालत ने ताजमहल के 22 दरवाजों को खुलवाने वाली याचिका को दायर करने वाले याचिकाकर्ताओं से कहा कि वह जाएं और एमए, नेट जेआरएफ करें और उसके बाद शोध में ऐसा विषय चुनें. फिर अगर कोई संस्थान उन्हें यह शोध करने से रोके तभी हमारे पास आएं. आज अदालत में हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता रजनीश सिंह के वकील ने कहा कि देश के नागरिकों को ताजमहल के बारे में सच जानने की जरूरत है. याचिकाकर्ता ने कहा- मैं कई आरटीआई लगा चुका हूं. मुझे पता चला है कि कई कमरे बंद हैं और प्रशासन की ओर से बताया गया कि ऐसा सुरक्षा कारणों की वजह से किया गया है. हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में आज जस्टिस डीके उपाध्याय और सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने मामले की सुनवाई की.

अगर कोई चीज ताजमहल में छिपाई गई, तो सबको जानने का हक है

याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कहा कि अगर कोई चीज ताजमहल में छिपाई गई है तो उसकी जानकारी जनता को होना चाहिए. वहीं वकील ने कहा कि मैंने औरंगजेब की एक चिट्ठी देखी है जो उसने अपने अब्बा को लिखी थी. अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता अपनी याचिका तक ही सीमित रहे. आप दरवाजे खोलने के लिए आदेश मांग रहे हैं. आप एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की मांग कर रहे हैं. इस तरह आप कोर्ट का समय बर्बाद कर रहे हैं. याचिकाकर्ता के वकील का कहना है कि वे अभी हार नहीं माने हैं। इस मामले में वे सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे।

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