January 23, 2026 9:56 AM

उत्तरांचल यूनिवर्सिटी मे सेमिनार का आयोजन, अधिवक्ता अरुणा नेगी चौहान ने महिलाओं के प्रति बढ़ते लैंगिक अपराध पर बेबाकी से रखी अपनी बात, मिला सम्मान…

देहरादून: महिलाओं के लिए कई कानून बनते जा रहे हैं।परंतु उनके बावजूद भी महिलाओं के प्रति अपराध में कमी नहीं आई और ना ही अपराधियों के हौसलों में कुछ कमी आई है। अब लगता है बढ़ते कानून के साथ-साथ अपराध और अधिक बढ़ रहे हैं बस तरीके बदलते जा रहे हैं क्योंकि कई अपराध ऐसे हैं जिसके विषय में कोई भी खुलकर किसी से बात तक नहीं करना चाहता जैसे महिलाओं के प्रति बढ़ते लैंगिक अपराध।  इसी विषय में उत्तरांचल यूनिवर्सिटी ने एक सेमिनार का आयोजन किया था जिसमें  दिल्ली एवं उत्तराखंड हाई कोर्ट अधिवक्ता अरुणा नेगी चौहान को बतौर मुख्य प्रवक्ता के लिए आमंत्रित किया गया ।

अधिवक्ता अरुणा नेगी चौहान ने वहां उपस्थित सभी महिलाओं छात्रों एवं महिला शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई विशाखा गाइडलाइंस के अंतर्गत उनके अधिकारों एवं कर्तव्यों के विषय में जागरूक किया।

अधिवक्ता अरुणा नेगी चौहान ने 2013 के अधिनियम महिलाओं का कार्य स्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण ,प्रतिशत एवं प्रतितोष ) के अनुसार यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी भी महिला को उसके कार्यस्थल पर अपने  सह कर्मचारी या किसी उच्च अधिकारी से किसी भी प्रकार की असुविधा एवं उसकी अस्मिता को ठेस पहुंचती है तो यह न केवल उसके सम्मान बल्कि उसके मूल अधिकारों का भी हनन है। जिसके लिए उस महिला कर्मचारी को शिकायत करने का स्वतंत्र अधिकार है।

अधिवक्ता अरुणा नेगी चौहान ने यह भी बताया की यदि इस प्रकार की कोई भी घटना किसी कार्य क्षेत्र में किसी महिला के साथ घटित होती है तो उसके मूल अधिकार हनन होते हैं जिसमें Article 14 समानता का अधिकार,  Article 15 जाति, धर्म, लिंग ,जन्म स्थान और वंश के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकता।

Article 19(1) (G)  संगम यl संघ बनाने का, कार्य करने का ,व्यापार करने का अधिकार, Article 21 स्वतंत्रता से जीवन यापन करने का अधिकार, यहां मुख्य रूप से आते हैं और यदि इन अधिकारों का हनन किसी संस्था कार्यस्थल या उद्योग में किसी महिला के साथ होता है तो इसकी शिकायत महिला या उसके लिए कोई अन्य व्यक्ति कर सकता है। यदि वह संस्था या कार्यस्थल पर महिला कर्मचारी को यह सब करने से रोका जाता है तो यह अपने आप में एक दंडनीय अपराध है।  जो कि भारतीय दंड संहिता के अधिनियम के अंतर्गत दंडनीय है।

अधिवक्ता अरुणा नेगी चौहान ने इस बात को स्पष्ट करते हुए कहा की महिलाओं का कार्य स्थल पर लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम 2013 के अंतर्गत यह सब प्रावधान दिए गए है कि वह महिला कहां कब और किसे कैसे शिकायत करेगी । और यदि कोई असुविधा उत्पन्न हो तो उसके लिए कहां से मदद लेगी। अधिवक्ता ने छात्राओं शिक्षिकाओं और वहाँ उपस्थित महिला कर्मचारियों यह सब तमाम बातें बताई जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों ने कानून को भली भांति जाना और समझा।

अधिवक्ता अरुण आने की चौहान को इस सराहनीय कार्य , उनकी बेबाकता, एवं हौसला अफजाई के लिए उत्तरांचल यूनिवर्सिटी मे कानून विभाग की HOD डॉ0 पूनम रावत और चेयरमैन प्रो0 भारती रमोला ने सम्मान से नवाजा। प्रो0 रमोला के मुताबिक महिलाएं ऐसे विषय में बोलने से कतराते हैं जिस विषय को अधिवक्ता अरुणा नेगी चौहान ने बड़े सरल शब्दों में सबके समक्ष रखा और सबको प्रेरित किया। वहीं डॉ0 पूनम रावत ने कहा की यह विषय सिर्फ सुनने का नहीं बल्कि समझने एवं सब को समझाने का है सब को जागरूक कराने का है।  डॉ0 पूनम रावत ने कहा की हम उम्मीद करते हैं की अधिवक्ता अरुणा नेगी चौहान आगे भी इस प्रकार के संवेदनशील मुद्दों पर बेबाकी से यूनिवेर्सिटी मे आकार विचार विमर्श करती रहेंगी एवं महिलाओं को प्रोत्साहित  करेंगी।

 

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